इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन का ताजा बयान चर्चा का बड़ा विषय बन गया है और इसने सौ गेंदों वाले नए प्रारूप पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एंडरसन ने साफ तौर पर कहा है कि पिछले साल जब उन्होंने इस लीग में हिस्सा लिया था, तब उन्हें इसमें खेलना बिल्कुल पसंद नहीं आया था।
बता दें कि टेस्ट क्रिकेट में सात सौ से ज्यादा विकेट लेने वाले एंडरसन को अब तक के सबसे महान तेज गेंदबाजों में गिना जाता है। ऐसे में उनका यह बयान उस टूर्नामेंट के लिए झटका माना जा रहा है, जिसे लोकप्रिय बनाने के लिए इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड लगातार कोशिश कर रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार एंडरसन ने पिछले साल मैनचेस्टर ओरिजिनल्स टीम की ओर से तीन मुकाबले खेले थे, जिसमें उन्होंने दो विकेट लिए थे। हालांकि इससे पहले वह टी२० प्रारूप में अच्छा प्रदर्शन कर चुके थे, लेकिन सौ गेंदों वाले इस नए प्रारूप में उनका अनुभव खास नहीं रहा था।
एंडरसन ने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने इस लीग में बिताया हर पल नापसंद किया और अब वह इस समय का इस्तेमाल आराम करने या अपनी फिटनेस पर ध्यान देने में करना चाहते हैं। गौरतलब है कि उन्होंने यह भी कहा कि इस साल जब यह टूर्नामेंट चलेगा, तब वह कहीं छुट्टी पर रहना पसंद करेंगे।
दरअसल, एंडरसन अब अपने करियर के इस चरण में लाल गेंद वाले लंबे प्रारूप पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं। बता दें कि वह काउंटी टीम लंकाशायर के नियमित कप्तान बनाए जा चुके हैं और उनका पूरा फोकस चार दिन के मुकाबलों में टीम को मजबूत बनाने पर है।
गौरतलब है कि पिछले सीजन में उन्होंने अंतरिम कप्तान के तौर पर टीम की कमान संभाली थी, जहां टीम ने पांच मैचों में दो जीत दर्ज की थीं। इसके बाद उन्हें स्थायी कप्तान बनाया गया। उन्होंने इस जिम्मेदारी को सम्मान की बात बताते हुए कहा कि टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का अच्छा संतुलन है।
मौजूद जानकारी के अनुसार एंडरसन का मुख्य लक्ष्य इस सीजन में अपनी टीम को शीर्ष डिविजन में वापस पहुंचाना है। उन्होंने साफ कहा कि टीम को प्रमोशन दिलाना उनकी प्राथमिकता है और इसके साथ ही वह चाहते हैं कि खिलाड़ी खेल का आनंद भी लें।
एंडरसन ने यह भी कहा कि काउंटी क्रिकेट कई बार एक रुटीन जैसा लगने लगता है, लेकिन खिलाड़ियों को याद रखना चाहिए कि उन्होंने यह खेल इसलिए शुरू किया था क्योंकि उन्हें इससे प्यार था।
कुल मिलाकर देखा जाए तो एंडरसन का यह बयान न सिर्फ एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत राय को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि पारंपरिक और नए प्रारूपों के बीच संतुलन बनाना अभी भी क्रिकेट के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।


