भदोही से भाजपा सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद ने लोकसभा में 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग उठाई। उन्होंने इसे सम्मान, अधिकार और भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल वर्गीकरण का नहीं, बल्कि इन जातियों के सम्मान, अधिकार और भविष्य से जुड़ा हुआ है। सांसद बिंद ने सदन को बताया कि जिन जातियों को उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में रखा गया है, वही जातियां देश के कई अन्य राज्यों, जैसे दिल्ली में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक ही समाज, परंपरा और जीवन शैली है, तो उनके अधिकार अलग-अलग क्यों होने चाहिए।
उन्होंने निषाद, केवट, मल्लाह, कश्यप, धीमर, प्रजापति, राजभर और विश्वकर्मा समेत कुल 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की जरूरत पर बल दिया। सांसद ने यह भी कहा कि जब तक इन जातियों को SC में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इनके लिए विशेष आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठती रही है, जिसे अब लोकसभा में प्रमुखता के साथ रखा गया है।


