‘बिना काम किये नहीं लूंगा वेतन’, राजनीति में जाने को लेकर क्या बोले IAS रिंकू सिंह?

‘बिना काम किये नहीं लूंगा वेतन’, राजनीति में जाने को लेकर क्या बोले IAS रिंकू सिंह?

IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही इन दिनों अपने एक फैसले को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने व्यवस्था के सामने एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। रिंकू सिंह ने यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है कि जब उनके पास जनता के लिए करने को कोई काम ही नहीं है तो वे मुफ्त का वेतन नहीं लेना चाहते। उन्होंने साफ किया है कि वे सेवा से बाहर नहीं जा रहे बल्कि वहां जाना चाहते हैं जहां उन्हें काम करने का मौका मिले।

‘नो वर्क, नो पे’ की बात

रिंकू सिंह राही ने कहा कि प्रशासनिक सेवा का सबसे बड़ा उद्देश्य जनता की भलाई के लिए काम करना होता है। लेकिन जब किसी अधिकारी को कोई जिम्मेदारी या काम ही न दिया जाए तो उस पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि हमें मिलने वाली सैलरी जनता के टैक्स के पैसे से आती है। अगर हम जनता के लिए कुछ कर ही नहीं पा रहे तो वह पैसा लेना नैतिक रूप से गलत है। इसी सिद्धांत के कारण उन्होंने ‘नो वर्क, नो पे’ की बात कही है।

क्यों दिया ‘तकनीकी त्यागपत्र’?

रिंकू सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पूरी तरह से सरकारी सेवा नहीं छोड़ी है बल्कि ‘तकनीकी त्यागपत्र’ (Technical Resignation) दिया है। इसका एक खास कारण है। नियमों के मुताबिक, एक अधिकारी के पास तीन साल का ‘लीन पीरियड’ होता है जिसमें वह अपनी पुरानी सेवा (PCS) में वापस लौट सकता है। रिंकू सिंह पहले पीसीएस अधिकारी थे और बाद में आईएएस बने। उनका कहना है कि अगर आईएएस में उन्हें कोई ठोस काम नहीं मिल रहा है तो वे पीसीएस में वापस जाकर जमीनी स्तर पर काम करना बेहतर समझते हैं।

राजनीति में नहीं जाऊंगा

रिंकू सिंह के इस्तीफे के बाद कई लोग यह अनुमान लगा रहे थे कि वे शायद राजनीति में कदम रखने वाले हैं। लेकिन उन्होंने इन सभी चर्चाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है। उनका एकमात्र लक्ष्य प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर रहकर ही जनता की सेवा करना है। वे किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बनने के बजाय एक अधिकारी के रूप में लोगों की समस्याओं को सुलझाना चाहते हैं।

जमीनी काम पर फोकस

एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वे ऐसी जगह तैनात होना चाहते हैं जहां उनका सीधा संपर्क आम लोगों से हो। उनका मानना है कि मैदान में उतरकर काम करने से ही असली समस्या का पता चलता है। साथ ही उन्होंने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात भी कही। वे चाहते हैं कि जनता को पता चले कि सरकारी पैसा कहां और कैसे खर्च हो रहा है। रिंकू सिंह का यह फैसला अब सरकार के पास है और उनके अगले कदम का सभी को इंतजार है।

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