हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर हम आपको मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की राजस्थान सीमा से लगे अरन्या गांव के उस खेड़ापति हनुमान मंदिर की कहानी बता रहे हैं, जिसे करीब 200 साल पुराना माना जाता है। छापी नदी के किनारे स्थित यह मंदिर आज क्षेत्र में आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गांव बसने के साथ ही स्थापित हुई प्रतिमा ग्रामीणों के अनुसार, जब अरन्या गांव बस रहा था, उसी समय यहां एक चबूतरे पर खेड़ापति हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। उस समय मंदिर नहीं था, केवल एक चबूतरा था जहां ग्रामीण पूजा करते थे। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी और आसपास के गांवों से भी लोग आने लगे। धीरे-धीरे यहां भव्य मंदिर का निर्माण हो गया। जब मजदूर खंभे खड़े नहीं कर पाए मंदिर से जुड़ी एक घटना आज भी लोगों की आस्था का आधार है। करीब 70 साल पहले चबूतरे के ऊपर छत बनाने का काम शुरू किया गया। इसके लिए बाहर से पत्थर के बड़े खंभे मंगवाए गए थे। बताया जाता है कि मजदूरों ने खंभे खड़े करने की कई बार कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। जब मजदूर गांव में लोगों को बुलाने गए और कुछ समय बाद लौटे, तो खंभे अपने-आप खड़े मिले। इस घटना को लोगों ने हनुमान जी की कृपा माना और इसके बाद मंदिर की पहचान दूर-दूर तक फैल गई। मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है भीड़ आज खेड़ापति हनुमान मंदिर में हर मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सुबह से ही दर्शन का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो दिनभर जारी रहता है। कई लोग परिवार के साथ यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। मनोकामना पूरी होने पर भक्त सुंदरकांड का पाठ करवाते हैं और भंडारा करते हैं। सुंदरकांड के लिए पहले से नंबर लगाना पड़ता है और कई बार अधिक भीड़ के कारण करीब 6 महीने तक इंतजार करना पड़ता है। जनसहयोग से हुआ विस्तार साल 2005 से गांव के लोगों और श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर परिसर का विस्तार किया जा रहा है। यहां धर्मशालाएं भी बनाई जा रही हैं, ताकि दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने की सुविधा मिल सके। मंदिर में पंडित नारायण शर्मा पिछले करीब 10 साल से पूजा-पाठ कर रहे हैं। हनुमान जन्मोत्सव पर विशेष आयोजन हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भगवान बजरंग बली का अभिषेक किया जाएगा, इसके बाद आकर्षक श्रृंगार और विशेष आरती होगी। मंदिर से जुड़े पंडित मुकेश शर्मा के अनुसार, इस अवसर पर भगवान हनुमान को 3 क्विंटल नुक्ती का भोग लगाया जाएगा। साथ ही हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ होगा तथा श्रद्धालुओं के लिए दिनभर भंडारा आयोजित किया जाएगा। करीब दो सदियों पुराना यह मंदिर आज आस्था और विश्वास का ऐसा केंद्र बन चुका है, जहां श्रद्धालु दूर-दूर से आकर हनुमान जी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं।


