निवेश आकर्षित करने की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहे राज्यों के बीच राजस्थान अब अपनी रणनीति बदलने जा रहा है। नई औद्योगिक नीति के जरिए सेक्टरवाइज रोडमैप तैयार कर निवेशकों को स्पष्ट दिशा देने की कोशिश है। अब तक बिखरे फोकस और धीमी क्रियान्वयन गति के कारण कई संभावनाओं के बावजूद निवेश सीमित रहा। ऐसे में राज्य सरकार प्रदेश में निवेश बढ़ाने और औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए जल्द ही नई औद्योगिक नीति लाने की तैयारी में है। नीति का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। नीति के तहत मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई, टेक्सटाइल, रिन्यूएबल पर्यटन, एनर्जी, आइटी-आइटीईएस और खनन जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर अलग अलग फोकस रखा जाएगा।
हर सेक्टर के लिए निवेश, उत्पादन और रोजगार सृजन के स्पष्ट लक्ष्य तय किए जा रहे हैं, ताकि योजनाबद्ध तरीके से विकास सुनिश्चित हो सके। जमीन आवंटन, बिजली-पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स सुधार को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
क्यों है जरूरी?
- उद्योगों की ग्रोथ दर असमान, कई सेक्टरों में संभावनाएं होने के बावजूद निवेश सीमित।
- बड़े निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए स्पष्ट रोडमैप जरूरी।
- एमएसएमई की 7-8 लाख इकाइयों को टेक्नोलॉजी और वित्तीय सपोर्ट की जरूरत।
- खनिज संपदा भरपूर, लेकिन वैल्यू एडिशन और डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्री अभी कम विकसित।
- टेक्सटाइल व पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक व ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की जरूरत।
- रिन्यूएबल एनर्जी में अग्रणी होने के बावजूद इंडस्ट्रियल उपयोग बढ़ाने की संभावनाएं बाकी।
- लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में सुधार से लागत घटाने की आवश्यकता
- सिंगल विंडो सिस्टम के बावजूद मंजूरी प्रक्रियाओं में और तेजी की जरूरत।
- युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की चुनौती।
- अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए स्पष्ट और सेक्टर आधारित नीति जरूरी।
अब क्या बदलेगा
- हर सेक्टर के लिए अलग रोडमैप।
- निवेश, उत्पादन, रोजगार के लक्ष्य तय।
- जमीन, बिजली, लॉजिस्टिक्स पर फोकस।
- ग्रीन इंडस्ट्री और नई तकनीकों को बढ़ावा।
अब होगा एक विजन
- अब तक की पॉलिसियों में प्रावधान, छूट और प्रक्रियाओं पर ज्यादा फोकस, स्पष्ट विजन का अभाव रहा।
- अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग- अलग पॉलिसियां हैं।
- नई पॉलिसी में पहली बार सेक्टरवार स्पष्ट विजन तय होगा।
- आगे बढ़ने के लिए रोडमैप तैयार होगा।


