रिजाइन लेटर पर साइन नीतीश का ही ना?:पहले एक साथ हिन्दी-उर्दू में करते थे, अब सीधा सपाट नाम लिखा, क्या मुख्यमंत्री के सिग्नेचर बदल गए

रिजाइन लेटर पर साइन नीतीश का ही ना?:पहले एक साथ हिन्दी-उर्दू में करते थे, अब सीधा सपाट नाम लिखा, क्या मुख्यमंत्री के सिग्नेचर बदल गए

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उनका इस्तीफा पत्र सामने आया। हमने (भास्कर) उनके इस्तीफा पत्र को देखा तो उनके हस्ताक्षर में बदलाव दिखा। फिर हमने उनके पिछले सभी हस्ताक्षरों को खंगाला। हमारी जांच में पता चला कि नीतीश कुमार का इस्तीफा पत्र पर जो सिग्नेचर है, वह पहले की सालों से अलग है। सोर्सेज ने हमें बताया कि बढ़ती उम्र के कारण हस्ताक्षर बदल गया होगा। भास्कर एक्सक्लूसिव में जानिए, नीतीश कुमार के हस्ताक्षर में क्या बदलाव हुआ है। पहले कैसे सिग्नेचर करते थे। सबसे पहले जानिए इस्तीफा पत्र का साइन कैसा है मुख्यमंत्री ने इस्तीफा पत्र विधान परिषद के सभापति को भेजा। लेटर के अंतिम हिस्सा में उनका सिग्नेचर है। पूरी साइन हिन्दी के अक्षरों में किया गया है। नीतीश ने अपने नाम को हू-ब-हू (नीतीश कुमार) हिन्दी में लिखा है। यह ऐसा पहला मौका है जब उन्होंने अपना हस्ताक्षर हिंदी में सीधा और सपाट किया है। सीएम बनने से लेकर पिछले कुछ सालों तक उनकी लिखावट काफी अट्रैक्टिव हुआ करती थी। सीधा सपाट नहीं। अब पहले के हस्ताक्षर को जानिए नीतीश कुमार की सोशल इंजीनियरिंग राजनीतिक और प्रशासनिक लेवल तक ही सीमित नहीं थी। उन्होंने अपने साइन में भी देवनागरी और फारसी (हिन्दी और उर्दू) का तड़का लगा रखा था। उनके नजदीकियों की माने तो नीतीश अपने सिग्नेचर में हिन्दी और उर्दू शब्द का प्रयोग करते थे। वे अपने नाम का पहला हिस्सा हिन्दी (देवनागरी) में और सरनेम उर्दू में लिखते थे। अब जानिए नीतीश ने रेजिग्नेशन लेटर में क्या लिखा? स्थान- पटना तिथि-30-02-2026 सेवा में, सभापति, बिहार विधान परिषद, पटना महाशय, मैं इसके द्वारा तिथि 30-03-2026 से सदन से अपने स्थान का त्यागपत्र देता हूं। आपका विश्वसनीय, (हस्ताक्षर ) 30/3/2026 परिषद सदस्य कब से बदला नीतीश का सिग्नेचर? नीतीश कुमार के सिग्नेचर में बदलाव अभी हाल के दिनों में देखने को मिल रहा है। वह साल 2024 तक हिंदी और उर्दू मिलाकर साइन करते थे। संपत्ति के ब्योरा पर साइन और चुनावी हलफनामे के सिग्नेचर में बदलाव देखा गया है। नीतीश कुमार ने 2025 से साइन बदला। 22 दिसंबर 2025 को संपत्ति की घोषणा और राज्यसभा के नॉमिनेशन लेटर में सिर्फ हिन्दी (देवनागरी) में सिग्नेचर किया। इससे पहले वे सारे दस्तावेज पर हिन्दी और उर्दू में साइन करते थे। मार्च 2024 में नीतीश ने बिहार विधान परिषद के सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया था। अपने शपथ पत्र पर उन्होंने साइन किया था। इसमें नीतीश कुमार लिखने का तरीका अभी से अलग था।
सिर्फ दस्तखत नहीं, नीतीश ने यात्रा का पैटर्न भी बदला नीतीश कुमार अपनी यात्राओं के लिए प्रसिद्ध हैं। 2005 में उन्होंने न्याय यात्रा की थी। इसके बाद उन्हें बिहार के सीएम पद की जिम्मेदारी जनता ने दी। इसके बाद से वह लगातार यात्राएं कर रहे हैं। हाल ही में उनकी समृद्धि यात्रा पूरी हुई। यह उनकी 16वीं यात्रा थी। वक्त के साथ नीतीश ने अपने यात्रा के पैटर्न को बदला। पहले नीतीश गांव-गांव पैदल घूमते थे। आम लोगों के घर जाते, उनसे बातें करते थे। जिलों में रातभर रुकते। तंबू लगाकर ठहरते थे। अब उनकी जनता से दूरी दिखती है। सीएम अधिकारियों से घिरे दिखते हैं। उन्हें पहले की तरह लोग सीधे रियल फीडबैक नहीं दे पाते हैं। कैसी थी नीतीश कुमार की तंबू वाली यात्रा? 2005 और इसके बाद के कुछ सालों तक नीतीश कुमार की यात्रा लंबी चलती थी। सड़क मार्ग से गाड़ी में सवार होकर यात्रा करते थे। यात्रा के लिए दो टेंट का सेटअप रहता था। एक टेंट जहां यात्रा कर रहे हैं, दूसरा टेंट जहां अगले दिन जाने वाले हैं, वहां लगता। तीन तरह के टेंट लगाए जाते थे। टेंट का पहला सेटअप नीतीश कुमार और उनके साथ मौजूद मंत्री व प्रभारी मंत्रियों के लिए होता। सीएम व मंत्री इसी में रात में सोते। टेंट का दूसरा सेट अधिकारियों के लिए होता था, जिसमें वे रात में सोते थे। तीसरे टेंट में जनता दरबार लगता था। सीएम सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकल जाते। गांव-गांव घूमते। लोगों के दरवाजे पर जाते। बैठते, उनसे बातें करते। पूछते कोई परेशानी है क्या? कोई समस्या बताता तो तुरंत अधिकारियों को इसके समाधान के लिए कहते। इस तरह एक दिन में कई लोगों के घर जाते। उनके यहां चाय पीते। तंबू लौटकर नीतीश कुमार स्नान करते, फिर तैयार होकर जनता दरबार में जाते। लोगों से मिलते, उनकी परेशानी सुनते। अधिकारियों को उन्हें दूर करने के लिए कहते। उनके साथ लोक गायकों की टीम चलती थी। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होता। सर्दी का मौसम हो तो अंगीठी जलती, आग तापते। रात में 12-1 बजे तक बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों से बात करते, फिर सोने चले जाते। अगले दिन कमोबेश ऐसा ही रूटीन होता था। अब कैसी रही नीतीश कुमार की हेलीकॉप्टर वाली यात्रा? नीतीश कुमार अब हेलीकॉप्टर से यात्रा वाली जगह पहुंचते हैं। रात में जिले में नहीं रुकते। सुबह करीब 10 बजे सीएम आवास से नाश्ता कर निकलते हैं। जिस जिले में यात्रा चल रही हो वहां उनका काफिला पहले से तैयार रहता है। नीतीश हेलीकॉप्टर से पहुंचते। इसके बाद गाड़ी में सवार होकर दिन भर घूमते हैं। विकास योजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास करते हैं। जीविका दीदियों से मिलते हैं। जनसंवाद में चुने हुए लोगों से बात करते हैं। जीविका दीदियों द्वारा लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण करते हैं। जिला मुख्यालय में या किसी और जगह सरकारी भवन में संबंधित जिला के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हैं। इसमें बिहार सरकार के बड़े अधिकारी भी रहते हैं। शाम तक हेलिकॉप्टर से पटना लौट जाते हैं। नीतीश के काफिले और सुरक्षाबलों की एक और टीम दूसरे जिले में तैनात रहती है, जहां अगले दिन उन्हें यात्रा करनी हो। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उनका इस्तीफा पत्र सामने आया। हमने (भास्कर) उनके इस्तीफा पत्र को देखा तो उनके हस्ताक्षर में बदलाव दिखा। फिर हमने उनके पिछले सभी हस्ताक्षरों को खंगाला। हमारी जांच में पता चला कि नीतीश कुमार का इस्तीफा पत्र पर जो सिग्नेचर है, वह पहले की सालों से अलग है। सोर्सेज ने हमें बताया कि बढ़ती उम्र के कारण हस्ताक्षर बदल गया होगा। भास्कर एक्सक्लूसिव में जानिए, नीतीश कुमार के हस्ताक्षर में क्या बदलाव हुआ है। पहले कैसे सिग्नेचर करते थे। सबसे पहले जानिए इस्तीफा पत्र का साइन कैसा है मुख्यमंत्री ने इस्तीफा पत्र विधान परिषद के सभापति को भेजा। लेटर के अंतिम हिस्सा में उनका सिग्नेचर है। पूरी साइन हिन्दी के अक्षरों में किया गया है। नीतीश ने अपने नाम को हू-ब-हू (नीतीश कुमार) हिन्दी में लिखा है। यह ऐसा पहला मौका है जब उन्होंने अपना हस्ताक्षर हिंदी में सीधा और सपाट किया है। सीएम बनने से लेकर पिछले कुछ सालों तक उनकी लिखावट काफी अट्रैक्टिव हुआ करती थी। सीधा सपाट नहीं। अब पहले के हस्ताक्षर को जानिए नीतीश कुमार की सोशल इंजीनियरिंग राजनीतिक और प्रशासनिक लेवल तक ही सीमित नहीं थी। उन्होंने अपने साइन में भी देवनागरी और फारसी (हिन्दी और उर्दू) का तड़का लगा रखा था। उनके नजदीकियों की माने तो नीतीश अपने सिग्नेचर में हिन्दी और उर्दू शब्द का प्रयोग करते थे। वे अपने नाम का पहला हिस्सा हिन्दी (देवनागरी) में और सरनेम उर्दू में लिखते थे। अब जानिए नीतीश ने रेजिग्नेशन लेटर में क्या लिखा? स्थान- पटना तिथि-30-02-2026 सेवा में, सभापति, बिहार विधान परिषद, पटना महाशय, मैं इसके द्वारा तिथि 30-03-2026 से सदन से अपने स्थान का त्यागपत्र देता हूं। आपका विश्वसनीय, (हस्ताक्षर ) 30/3/2026 परिषद सदस्य कब से बदला नीतीश का सिग्नेचर? नीतीश कुमार के सिग्नेचर में बदलाव अभी हाल के दिनों में देखने को मिल रहा है। वह साल 2024 तक हिंदी और उर्दू मिलाकर साइन करते थे। संपत्ति के ब्योरा पर साइन और चुनावी हलफनामे के सिग्नेचर में बदलाव देखा गया है। नीतीश कुमार ने 2025 से साइन बदला। 22 दिसंबर 2025 को संपत्ति की घोषणा और राज्यसभा के नॉमिनेशन लेटर में सिर्फ हिन्दी (देवनागरी) में सिग्नेचर किया। इससे पहले वे सारे दस्तावेज पर हिन्दी और उर्दू में साइन करते थे। मार्च 2024 में नीतीश ने बिहार विधान परिषद के सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया था। अपने शपथ पत्र पर उन्होंने साइन किया था। इसमें नीतीश कुमार लिखने का तरीका अभी से अलग था।
सिर्फ दस्तखत नहीं, नीतीश ने यात्रा का पैटर्न भी बदला नीतीश कुमार अपनी यात्राओं के लिए प्रसिद्ध हैं। 2005 में उन्होंने न्याय यात्रा की थी। इसके बाद उन्हें बिहार के सीएम पद की जिम्मेदारी जनता ने दी। इसके बाद से वह लगातार यात्राएं कर रहे हैं। हाल ही में उनकी समृद्धि यात्रा पूरी हुई। यह उनकी 16वीं यात्रा थी। वक्त के साथ नीतीश ने अपने यात्रा के पैटर्न को बदला। पहले नीतीश गांव-गांव पैदल घूमते थे। आम लोगों के घर जाते, उनसे बातें करते थे। जिलों में रातभर रुकते। तंबू लगाकर ठहरते थे। अब उनकी जनता से दूरी दिखती है। सीएम अधिकारियों से घिरे दिखते हैं। उन्हें पहले की तरह लोग सीधे रियल फीडबैक नहीं दे पाते हैं। कैसी थी नीतीश कुमार की तंबू वाली यात्रा? 2005 और इसके बाद के कुछ सालों तक नीतीश कुमार की यात्रा लंबी चलती थी। सड़क मार्ग से गाड़ी में सवार होकर यात्रा करते थे। यात्रा के लिए दो टेंट का सेटअप रहता था। एक टेंट जहां यात्रा कर रहे हैं, दूसरा टेंट जहां अगले दिन जाने वाले हैं, वहां लगता। तीन तरह के टेंट लगाए जाते थे। टेंट का पहला सेटअप नीतीश कुमार और उनके साथ मौजूद मंत्री व प्रभारी मंत्रियों के लिए होता। सीएम व मंत्री इसी में रात में सोते। टेंट का दूसरा सेट अधिकारियों के लिए होता था, जिसमें वे रात में सोते थे। तीसरे टेंट में जनता दरबार लगता था। सीएम सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकल जाते। गांव-गांव घूमते। लोगों के दरवाजे पर जाते। बैठते, उनसे बातें करते। पूछते कोई परेशानी है क्या? कोई समस्या बताता तो तुरंत अधिकारियों को इसके समाधान के लिए कहते। इस तरह एक दिन में कई लोगों के घर जाते। उनके यहां चाय पीते। तंबू लौटकर नीतीश कुमार स्नान करते, फिर तैयार होकर जनता दरबार में जाते। लोगों से मिलते, उनकी परेशानी सुनते। अधिकारियों को उन्हें दूर करने के लिए कहते। उनके साथ लोक गायकों की टीम चलती थी। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होता। सर्दी का मौसम हो तो अंगीठी जलती, आग तापते। रात में 12-1 बजे तक बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों से बात करते, फिर सोने चले जाते। अगले दिन कमोबेश ऐसा ही रूटीन होता था। अब कैसी रही नीतीश कुमार की हेलीकॉप्टर वाली यात्रा? नीतीश कुमार अब हेलीकॉप्टर से यात्रा वाली जगह पहुंचते हैं। रात में जिले में नहीं रुकते। सुबह करीब 10 बजे सीएम आवास से नाश्ता कर निकलते हैं। जिस जिले में यात्रा चल रही हो वहां उनका काफिला पहले से तैयार रहता है। नीतीश हेलीकॉप्टर से पहुंचते। इसके बाद गाड़ी में सवार होकर दिन भर घूमते हैं। विकास योजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास करते हैं। जीविका दीदियों से मिलते हैं। जनसंवाद में चुने हुए लोगों से बात करते हैं। जीविका दीदियों द्वारा लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण करते हैं। जिला मुख्यालय में या किसी और जगह सरकारी भवन में संबंधित जिला के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हैं। इसमें बिहार सरकार के बड़े अधिकारी भी रहते हैं। शाम तक हेलिकॉप्टर से पटना लौट जाते हैं। नीतीश के काफिले और सुरक्षाबलों की एक और टीम दूसरे जिले में तैनात रहती है, जहां अगले दिन उन्हें यात्रा करनी हो।  

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