तेल संकट के बीच एकजुट हुए ये मुस्लिम देश, पाकिस्तान में हुई वार्ता

तेल संकट के बीच एकजुट हुए ये मुस्लिम देश, पाकिस्तान में हुई वार्ता

ईरान-इजरायल के बढ़ते तनाव का असर पूरे विश्व भर में देखने को मिल रहा है। तेल संकट के बीच रविवार को पाकिस्तान में तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को रोकने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के उपायों पर चर्चा की।मीडिया अनुसार, इस वार्ता का मुख्य फोकस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पोतों के लिए फिर से खोलने के प्रस्तावों पर था। पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। बैठक में शामिल देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और युद्ध को जल्द समाप्त करने के संभावित तरीकों पर विचार किया।

क्षेत्रीय शक्तियों की साझा योजना

पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने बैठक के पहले दिन कहा कि सभी पक्षों ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर भरोसा जताया है और चीन ने इस पहल का समर्थन किया है। बैठक के दौरान क्षेत्रीय शक्तियों ने अमेरिका को समुद्री यातायात और तेल प्रवाह से जुड़े प्रस्ताव भी भेजे। इसमें स्वेज नहर जैसी शुल्क संरचनाओं के विकल्प पर चर्चा की गई।

कंसोर्टियम बनाने की योजना

पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से तेल प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए एक कंसोर्टियम बनाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। पाकिस्तान से भी इसमें शामिल होने का अनुरोध किया गया है, हालांकि इस्लामाबाद ने औपचारिक भागीदारी से इनकार किया है।

तुर्की की प्राथमिकता

तुर्की के एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि अंकारा की मुख्य प्राथमिकता युद्धविराम करना है। उनका कहना है कि जहाजों के सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना विश्वास बहाली का महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। सुरक्षा और विश्वास बहाली की दिशा में कदम उठाते हुए, पाकिस्तान ने घोषणा की कि ईरान ने पाकिस्तानी ध्वज वाले 20 जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है।

अमेरिका, ईरान और इजरायल बैठक में नहीं थे

इस वार्ता में अमेरिका, ईरान और इजरायल के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए। बैठक से पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपने तुर्की और मिस्र समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत शुरू करना था। हालांकि, इस चर्चा के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच दूरी कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि युद्ध निर्णायक मोड़ पर है, जबकि ईरानी नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार किया है।

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