Middle East Crisis 2026: पिछले दिनों महायुद्ध में ईरान के मिनाब स्कूल को निशाना बनाया गया। हमले में 168 मासूम बच्चों और 7 लोगों की जान चली गई। अब ईरान ने इस हमले के पीछे सीधे अमेरिका के दो नौसेना अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।
ईरान का दावा है कि इन अधिकारियों ने मिसाइल हमले का आदेश दिया था। इतना ही नहीं, ईरान ने उनके नाम और तस्वीरें भी सार्वजनिक कर दी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इस खुलासे के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बात दें ईरानी एम्बेसी ने रविवार को भारत, दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया समेत कई देशों में अधिकारियों की तस्वीरें जारी कीं।
‘X’ पर एक पोस्ट में, एम्बेसी ने आरोप लगाया कि दोनों अधिकारियों ने तीन बार अमेरिका की सबसे खतरनाक टॉमहॉक मिसाइलों के लॉन्च की इजाजत दी, जिससे 28 फरवरी को जानलेवा हमला हुआ।
ईरानी एम्बेसी: इन दो क्रिमिनल्स को याद रखें…
भारत में मौजूद ईरान की एम्बेसी ने ‘X’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि इन दो क्रिमिनल्स अमेरिकी नौसेना अधिकारी- लेह आर. टेट और जेफरी ई. यॉर्क को याद रखें। एम्बेसी के मुताबिक, इन दोनों ने मिनाब के एक स्कूल पर तीन टॉमहॉक मिसाइल दागने का आदेश दिया, जिसमें 168 मासूम बच्चों की मौत हो गई।
इसी तरह दक्षिण अफ्रीका में ईरानी एम्बेसी ने भी ऐसा ही पोस्ट शेयर किया। उसमें सवाल उठाया गया कि क्या इन अधिकारियों के अपने बच्चे नहीं हैं, और क्या वे इस घटना के बाद सुकून से रह पाते होंगे।
वहीं नाइजीरिया में ईरानी एम्बेसी ने हैरानी जताते हुए कहा कि इन दोनों अधिकारियों ने इतना बड़ा हमला करवाया, फिर भी वे रात को चैन से कैसे सोते होंगे।
अमेरिका: सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट नहीं किया
हाल ही में जिनेवा में हुई एक अहम बहस के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मिनाब के शजारेह तैयबेह गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले को सोचा-समझा हमला बताया। उनका कहना है कि इस हमले में 175 से ज्यादा छात्र और शिक्षक मारे गए और इसे जानबूझकर अंजाम दिया गया।
वहीं अमेरिका की शुरुआती जांच कुछ और इशारा करती है। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, हमला पुराने इंटेलिजेंस डेटा की वजह से हुआ हो सकता है। बताया जा रहा है कि असली निशाना स्कूल के पास मौजूद एक ईरानी सैन्य ठिकाना था, लेकिन गलत मैपिंग के कारण स्कूल पर हमला हो गया।
अमेरिका का कहना है कि उसने नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाया और जांच अभी जारी है। दूसरी ओर, ईरान ने इसे युद्ध अपराध बताते हुए अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।


