अमावस्या की रात का ‘गुप्त दरबार’, अशोक खरात के घर जुटती थी रहस्यमयी महफिल…पीछे क्या है राज?

अमावस्या की रात का ‘गुप्त दरबार’, अशोक खरात के घर जुटती थी रहस्यमयी महफिल…पीछे क्या है राज?

Ashok Kharat: महाराष्ट्र के नासिक में एक ऐसा बंगला, जो बाहर से तो अध्यात्म और शांति का केंद्र दिखता था, लेकिन उसकी चारदीवारी के भीतर का सच किसी हॉरर या सस्पेंस फिल्म से कम नहीं है। खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले अशोक खरात के आलीशान बंगले ‘तृप्तबाला’ को लेकर हो रहे खुलासों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। महंगी गाड़ियां, रसूखदार चेहरे और अमावस्या की काली रात का कनेक्शन अब जांच एजेंसियों के रडार पर है।

आपको बता दें कि वहां के स्थानीय लोगों ने जो दावा किया है उसके बाद यह मामला और रहस्यमयी बना गया है। बताया जा रहा है कि हर अमावस्या की रात को इस बंगले के बाहर लग्जरी गाड़ियों की लंबी कतारें लगती थीं। दिलचस्प बात यह है कि ये मेहमान खरात के आधिकारिक दफ्तर जाने के बजाय सीधे बंगले के पिछले रास्तों से दाखिल होते थे। चर्चा है कि इस ‘गुप्त दरबार’ में बड़े-बड़े राजनेता, रसूखदार अधिकारी और वीआईपी लोग अपनी हाजिरी लगाते थे। आखिर बंद दरवाजों के पीछे ऐसी कौन सी साधना या बैठक होती थी जिसे इतना गोपनीय रखा जाता था? यह सवाल अब पूरी नासिक की सियासत में गूंज रहा है।

किले जैसा सुरक्षा घेरा, विदेशी कुत्तों का पहरा

साल 2012 में करोड़ों की लागत से बने इस आलीशान बंगले को अशोक खरात ने एक अभेद्य किले की तरह सुरक्षित कर रखा था। ऊंची-ऊंची दीवारें और बेहद सीमित एंट्री पॉइंट्स के अलावा, सुरक्षा के लिए विदेशी नस्ल के खूंखार कुत्ते तैनात किए गए थे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन कुत्तों के डर से कोई भी बंगले के पास फटकने की हिम्मत नहीं करता था। सुरक्षा का यह तामझाम सिर्फ निजता के लिए था या किसी बड़े काले खेल को छिपाने के लिए, पुलिस अब इसकी पड़ताल कर रही है।

क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है?

अशोक खरात का यह साम्राज्य सिर्फ एक व्यक्ति की सनक है या इसके पीछे कोई संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था? जिस इलाके में तीन-तीन पूर्व विधायक रहते हों, वहां इतनी बड़ी गतिविधियां सालों तक बिना किसी शोर के चलती रहीं, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। जांच में अब उन नामों की तलाश की जा रही है जो अमावस्या की उन रातों में ‘तृप्तबाला’ की दहलीज पार करते थे।

सियासत और रहस्य का कॉकटेल

जांच एजेंसियों की हालिया कार्रवाई और स्थानीय लोगों के बयान इस कहानी को हर दिन एक नया मोड़ दे रहे हैं। नासिक का यह ‘आध्यात्मिक केंद्र’ अब विवादों का केंद्र बन चुका है। क्या यहां सत्ता के गलियारों की कोई बड़ी खिचड़ी पक रही थी या फिर आस्था के नाम पर कोई और ही खेल चल रहा था? सच जल्द ही सामने आने की उम्मीद है।

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