हैकिंग एक बेहद ही गंभीर समस्या है जो दुनियाभर में फैली हुई है। दुनियाभर में हैकिंग का असर देखने को मिलता है। अक्सर ही हैकर्स अपने देश में दूसरों के डेटा में सेंध लगाते हैं और उन्हें हैकिंग का शिकार बनाते हैं। ऐसे मामले भी अक्सर ही सामने आते हैं जब हैकर्स दूसरे देश के लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। पर अब हैकर्स के निशाने पर सिर्फ धरती ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष भी है। आने वाले समय में साइबर हमलों के निशाने पर अंतरिक्ष हो सकता है, जिसके बारे में चेतावनी सामने आई है।
सैटेलाइट्स की टक्कर करवा सकते हैं हैकर्स!
एस्टोनिया के साइबर सुरक्षा केंद्र ने चेतावनी दी है कि अगले 2 साल में हैकर्स सैटेलाइट्स पर साइबर हमला करते हुए नियंत्रण कर सकते हैं और उन्हें आपस में टकराने तक पर मजबूर कर सकते हैं।
कैसे हो सकती है सैटेलाइट्स की टक्कर?
पहले सैटेलाइट टेलीमेट्री को समझने के लिए तकनीकी दस्तावेजों की रिसर्च करनी पड़ती थी। अब एआई के एलएलएम (लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स) मिनटों में ऐसे कोड तैयार कर देते हैं जो सैटेलाइट सिस्टम में सेंध लगा सकें। समय के साथ यह टेक्नोलॉजी और ज़्यादा विकसित होती जाएगी, जिसका इस्तेमाल हैकर्स अंतरिक्ष में साइबर हमलों को अंजाम देने के लिए कर सकते हैं। वहीं अंतरिक्ष में पुराने सैटेलाइट्स हैं जिनकी टेक्नोलॉजी भी पुरानी है। इन सैटेलाइट्स में साइबर सुरक्षा का कोई कवच भी नहीं है, जिससे इन पर साइबर हमलों का जोखिम बढ़ जाता है।
मच सकती है तबाही
जनरेटिव एआई स्वयं नए फॉल्ट खोज सकती है और हमले की योजना में मदद कर सकती है। इसके ज़रिए हैकर्स सैटेलाइट्स के कंट्रोल में घुसकर उसके थ्रस्टर्स बदल सकते हैं, जिससे जानबूझकर टकराव हो सकता है। हैकर एआई का इस्तेमाल करते हुए किसी एक सैटेलाइट का नियंत्रण हासिल कर उसे दूसरे से टकरा देते हैं, तो इससे पैदा होने वाला कचरा अंतरिक्ष की पूरी कक्षा को भी तबाह कर सकता है। साथ ही इससे जीपीएस, मौसम पूर्वानुमान, इंटरनेट और संचार सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
मज़बूत सुरक्षा उपाय अपनाने की ज़रूरत
एस्टोनिया और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिक सिमुलेशन और ट्रेनिंग पर जोर दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब मज़बूत सुरक्षा उपाय अपनाने की तत्काल जरूरत है।


