छिंदवाड़ा जिले के तामिया के पास छातीआम गांव में जहां एसटीआर के बाघ को यूरिया देकर मारा, उस घटना स्थल पर अफीम की खेती करने का मामला भी उजागर हुआ है। यहां खेत में बड़ी संख्या में अफीम के पौधे लहराते मिले है। चोरी से अफीम की खेती की जा रही थी। अफीम के पौधों को देख फॉरेस्ट के अफसर भी दंग रह गए। जिसकी सूचना फॉरेस्ट ने लोकल पुलिस को सूचना दी। मामले गंभीर होने के बावजूद तामिया पुलिस ने 24 घंटे बाद भी उक्त जगह पर नहीं पहुंची। जिससे स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे? आखिर गंभीर पुलिस उस जगह कई नहीं पहुंची। बाघ के शिकार से वन विभाग की भी मॉनिटरिंग करने वाली टीम की भी बड़ी लापरवाही सामने आई। बाघ के रेडियो कॉलर से 3 मार्च से कोई हलचल नहीं हो रही थी। फॉरेस्ट टीम 23 दिन बाद लोकेशन के आधार पर खोजने पहुंची। तब बाघ के शिकार का मामला उजागर हुआ। सवाल यह है कि 23 दिनों तक मॉनिटरिंग टीम ने इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? दूसरी तरफ बाघ एसटीआर के देनवा बफर साथ-साथ छिंदवाड़ा पश्चिम वनमंडल के सांगाखेड़ा परिक्षेत्र छातीआम लगे राजस्व क्षेत्र में टहलता था। शिकार का आरोपी उदेसिंग (50) निवासी छातीआम के खेत आकर बाघ ने मवेशी को भी खाया था। ऐसे में आशंका है कि बाघ के बार बार खेत में आने से किसान से हमले का डर होगा और उन्हें पौधे से अफीम निकालने में अड़चन आ रही होगी। इसलिए उन्होंने बाघ को मारा होगा। हालांकि आरोपियों ने पूछताछ में बाघ के हमले से मवेशियों के मरने से नाराजगी के चलते बाघ को यूरिया देकर हत्या करने की बात स्वीकार की है। डेढ़ साल पहले बांधवगढ़ से लाया गया बाघ मृत मिला
एसटीआर क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने बताया कि शिकार हुए बाघ की उम्र करीब 4 साल थी। डेढ़ साल पहले बांधवगढ़ से लाकर बाघ को जंगल में छोड़ा गया था। बाघ देनवा बफर तो कभी छिंदवाड़ा के सामान्य वन मंडल क्षेत्र में आता जाता था। उसी के आसपास अपना रहवास बना लिया था। कॉलर आईडी ढूंढने के लिए स्टॉफ को भेजा
एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बाघ कॉलर आईडी निकालने के लिए विभाग को पत्र लिखा था। बाघ की आखिरी लोकेशन 3 मार्च मिली थी। बाघ स्थापित हो चुका था इसलिए नॉर्मल बाघों की तरह उसकी भी मॉनिटरिंग कर रहे थे। कॉलर आईडी निकालने के लिए टीम को 26 मार्च को लोकेशन के आधार पर गांव छाती आम में उदेसिंग के खेत में पहुंचे तो वहां एक बैल मृत अवस्था में मिला। जिससे शक बढ़ा। एसटीआर की डॉग अपोलो और छिंदवाड़ा फॉरेस्ट से डॉग स्कूबी को बुलाया। 27 मार्च को सुबह से दोनों डॉग स्क्वॉड ने सर्चिंग शुरू की, जो सूंघते हुए खेत मालिक उदेसिंग के घर पर जाकर रुके। किसान उदय सिंह से पूछताछ की तो उसने शिकार करना स्वीकार किया। इसी बीच एक डॉग 200 मीटर दूर जंगल में गड्ढे के पास रुके। जहां बाघ को मारने के बाद दफनाया गया था। खोदने पर बाघ का शव निकला। पश्चिम छिंदवाड़ा डीएफओ साहिल गर्ग ने बताया पांचों आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। पांचों को कोर्ट पेश किया। बाघ का पोस्टमार्टम कराया, जिसमें जहर से मौत की पुष्टि हुई। यह आरोपी गिरफ्तार
शिकार के मामले में मुख्य आरोपी उदेसिंग निवासी छातीआम है। उसके साथ में अन्य आरोपियों में बिसनलाल शीलू पिता जुगन (30) निवासी पुटईआम, मनोहर सिंग पिता कोमल (60) निवासी डोब झिरना जिला नर्मदापुरम, कैलाल पिता कारेसा निवासी कूचीखोह (65) और उसके बेटे मनक सिंह पिता उदेसिंग निवासी छातीआम तामिया को अरेस्ट किया। फॉरेस्ट के डॉग की अहम भूमिका
बाघ के शिकार के अंधे केस को 2 घंटे में सुलझाने में एसटीआर डॉग अपोलो और छिंदवाड़ा के स्कूबी की भी अहम भूमिका है। जो घटना स्थल से सूंघते हुए शिकारी के घर पहुंचे और गड्ढे में छिपे बाघ तक पहुंच गए। जिसके चलते एसटीआर और छिंदवाड़ा पश्चिम वन मंडल के अमले ने पांचों आरोपियों को अरेस्ट किया। गंभीर मामले में अफसरों के भी गोलमाल जवाब
छिंदवाड़ा डीएफओ साहिल गर्ग ने बताया कि अफीम की खेती की जानकारी परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा पुलिस विभाग को दी जा जाएगी। परिक्षेत्र अधिकारी की जांच के दौरान यह बिंदु मिला है, तो इसकी जानकारी पुलिस को दी जा रही है। मौखिक रूप से सूचना दी जा चुकी है। अपराधियों को कोर्ट में पेश करने के चलते आज लिखित सूचना नहीं दी जा सकी। छिंदवाड़ा पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने बताया कि फॉरेस्ट विभाग से जानकारी मिली है, इसमें टीम मौके पर जाकर जांच कराई जाएगी। जांच में जो बिंदु सामने आएंगे उसे पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अफीम की खेती के सबूत खत्म होने की आशंका
चोरी से अफीम की अवैध खेती में एक्शन लेने में पुलिस और फॉरेस्ट दोनों विभाग गंभीर नहीं है। फॉरेस्ट अधिकारी शिकार के आरोपियों को। जेल भेजने के कारण व्यस्तता का हवाला दें रहे तो, पुलिस अधिकारी टीम भेजकर जांच कराने का कह रहे। ऐसे में मौके से अफीम की खेती के पौधे उजाड़कर गायब करने की आशंका है। मामले में नारकोटिक्स विभाग को सूचना देनी चाहिए थी। एक एकड़ में ज्यादा 700से ज्यादा पौधे लगे, एक करोड़ कीमत
खेत में करीब एक एकड़ से ज्यादा में अफीम के पेड़ लगे है। जिनकी संख्या करीब 700 से ज्यादा है। पौधे में डोडा आ चुके। जिसमें चीरे लगे है। संभवतः अफीम निकलना शुरू हो गई है। कुछ दिन बाद खसखस निकलने की स्थिति में पहुंच जाएंगे। संभवतः इसकी कीमत करीबन 1करोड़ रुपए से ऊपर जा सकती है। बाघ की मॉनिटरिंग में लापरवाही, जांच कर कार्रवाई की मांग
कालर आईडी के बाघ के शिकार मामले में मॉनिटरिंग को लेकर लापरवाही बरतने के आरोप लगाएं है। वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने वन मंत्रालय भारत सरकार, राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण, वाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो और प्रमुख सचिव वन मप्र शासन को पत्र जांच की मांग की। उन्होंने लिखा बाघिन के रेडियो कॉलर से 3 मार्च से कोई हलचल नहीं हो रही थी। सवाल यह है कि 23 दिनों तक मॉनिटरिंग टीम ने इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? आशंका है कि बाघिन के रेडियो कॉलर सिग्नल के साथ छेड़छाड़ या ‘हैकिंग’ की गई हो। इसकी उच्च स्तरीय फॉरेंसिक जांच होनी चाहिए। मध्य प्रदेश में बाघों की बढ़ती मृत्यु दर (जनवरी से अब तक 14 मौतें) सुरक्षा तंत्र की विफलता को दर्शाती है। यह मांग की 3 साल में 5 बाघों का शिकार, गर्दन, पंजा काटकर ले गए


