शाहजहांपुर में शहीदों की प्रतिमाएं बुलडोजर से खंडित किए जाने के बाद नगर निगम का पूरा तंत्र सवालों के घेरे में आ गया है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वायरल पत्र में मुख्य रूप से नगर निगम के एक चर्चित अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। पत्र के अनुसार, जिस फर्म ने प्रतिमाओं को तोड़ा था, वह उस अधिकारी का करीबी है। आरोप है कि इसी फर्म को नगर निगम के नए भवन में फर्नीचर की आपूर्ति और लाइटिंग से संबंधित कार्य भी दिए गए। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि कई बार नियमों का उल्लंघन कर और अधूरे कागजात वाली फर्मों को भी ठेके दिए गए। आरोप है कि प्रतिमाएं तोड़ने के लिए जिस जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया था, उसे वर्कशॉप प्रभारी द्वारा लगाया गया था, और उसका ड्राइवर भी उसी अधिकारी का करीबी बताया गया है। इसी कारण उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, नगर आयुक्त ने वायरल पत्र की जानकारी होने से इनकार किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जिस फर्म से संबंधित व्यक्ति पर आरोप लगाए गए हैं, उसका अपर नगर आयुक्त से कोई रिश्तेदारी संबंध नहीं है। पत्र की सत्यता की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। नगर आयुक्त डाक्टर विपिन मिश्रा ने बताया कि फर्म को ब्लैक लिस्टेड किया गया था। जानकारी मिली है कि नये भवन में फर्नीचर सप्लाई का काम दिया गया है लेकिन अब तो वह ब्लैक लिस्टेड है। उन्होंने कहा कि वायरल पत्र की उनको कोई जानकारी नही है। फर्म से संबधित व्यक्ति अपर नगर आयुक्त का रिश्तेदार नही है। ये सब दिखवा लिया गया है।


