Dhurandhar 2 Actor Vivek Sinha: आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर नोटों की बारिश कर रही है। फिल्म का हर किरदार दर्शकों के जहन में बस गया है, लेकिन एक ऐसा नाम है जिसे सोशल मीडिया पर नफरत तो खूब मिल रही है, पर उससे कहीं ज्यादा प्यार भी मिल रहा है। यह नाम है विवेक सिन्हा का, जिन्होंने फिल्म में खूंखार किडनैपर ‘जहूर मिस्त्री’ का किरदार निभाया है। जहां फिल्म रिलीज से पहले उन्हें असली में लोग आंतकवादी कहकर गालियां दे रहे थे वहीं अब विवेक की तारीफ कर रहे हैं। उनकी अदाकारी का जादू सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि सरहद पार पाकिस्तान तक पहुंच गया है।
विलेन बनकर जीता पाकिस्तानियों का दिल (Vivek Sinha reveals getting I love you messages from Pakistan)
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान विवेक सिन्हा ने फिल्म की सफलता और अपने किरदार को मिल रहे रिस्पॉन्स पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह पाकिस्तानी आवाम उन पर प्यार बरसा रही है। विवेक ने हंसते हुए कहा, ‘मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। यह मेरी उम्मीदों से कहीं बढ़कर था। उन 14 सेकंड के फुटेज ने मुझे एक स्टार जैसा महसूस कराया। इसे देखने के बाद लोगों का खून खौल रहा था।’ और वहीं अब मुझे मुझे इंस्टाग्राम पर हजारों कमेंट्स और मैसेज आ रहे हैं। कई लोग तो लिख रहे हैं- ‘सर, आई लव यू फ्रॉम पाकिस्तान’। मैंने उन्हें जवाब दिया है कि भाई, हम बाद में बात करेंगे!

लोग कर रहे थे स्क्रीन में घुसकर मारने की बातें (Dhurandhar 2 Vivek Sinha messages received From Pakistan)
फिल्म में विवेक का एक विवादित डायलॉग है, जिसमें वह हिंदू कौम को लेकर टिप्पणी करते हैं। इस सीन की वजह से उन्हें काफी ट्रोल भी किया गया, लेकिन विवेक इसे अपनी एक्टिंग की जीत मानते हैं। उन्होंने बताया, “लोग कमेंट कर रहे हैं कि मुझे देखकर उन्हें इतना गुस्सा आता है कि उनका मन करता है स्क्रीन के अंदर घुसकर मुझे मारें। कुछ तो यह तक लिख रहे हैं कि वह पाकिस्तान आकर मुझे सबक सिखाएंगे। मुझे उन्हें समझाना पड़ा कि भाई, मैं पाकिस्तानी नहीं हूं, मैं शुद्ध भारतीय हूं और यूपी के बिजनौर (धामपुर) से ताल्लुक रखता हूं।”
6 साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया (Dhurandhar 2 Vivek Sinha)
परदे पर खूंखार दिखने वाले विवेक की असल जिंदगी काफी संघर्षों भरी रही है। जब वह महज 6 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी मां ने अकेले ही उन्हें पाला और कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। विवेक अपनी सफलता और आत्मविश्वास का पूरा श्रेय अपनी मां को देते हैं।

‘चौथा गांववाला’ से ‘जहूर मिस्त्री’ तक का सफर
दिलचस्प बात यह है कि विवेक कभी एक्टर बनना ही नहीं चाहते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह एक साधारण नौकरी कर रहे थे, तभी किसी दोस्त की सलाह पर उन्होंने थिएटर का रुख किया। विवेक बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्हें एक्टिंग का ‘अ’ भी नहीं पता था। उन्हें अपने पहले नाटक में ‘चौथा गांववाला’ का रोल मिला था, जिसमें पूरी स्क्रिप्ट में उनकी सिर्फ एक लाइन थी। लेकिन आज वही ‘गांववाला’ अपनी मेहनत के दम पर देश के सबसे चर्चित विलेन्स में से एक बन गया है। ‘धुरंधर 2’ की इस कामयाबी ने विवेक सिन्हा को रातों-रात स्टार बना दिया है, और उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर मायानगरी आते हैं।


