सहरसा में भारत मुक्ति मोर्चा का विरोध प्रदर्शन:जाति जनगणना, रोहित एक्ट और शिक्षकों को राहत की मांग

सहरसा में भारत मुक्ति मोर्चा का विरोध प्रदर्शन:जाति जनगणना, रोहित एक्ट और शिक्षकों को राहत की मांग

भारत मुक्ति मोर्चा ने सोमवार को सहरसा में विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन और रैली निकाली। यह राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए गए। रैली अंबेडकर पुस्तकालय, सहरसा से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए जिला मुख्यालय तक पहुंची। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित जनगणना कराने और ओबीसी वर्ग के साथ कथित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने केंद्र सरकार पर ओबीसी समाज के साथ धोखाधड़ी का आरोप भी लगाया। केंद्र पर ओबीसी समाज के साथ धोखाधड़ी का आरोप नेताओं ने शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण छात्र मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। हैदराबाद के छात्र रोहित वेमुला का जिक्र करते हुए ‘रोहित एक्ट’ लागू करने की मांग की गई, ताकि देशभर के शिक्षण संस्थानों में समानता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। आंदोलनकारियों ने 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की भी मांग दोहराई। उनका तर्क था कि यह नियम पुराने शिक्षकों के साथ अन्यायपूर्ण है और उन्हें इससे राहत मिलनी चाहिए। इस प्रदर्शन में भारत मुक्ति मोर्चा के प्रमंडल उप प्रभारी महेंद्र कुमार, मुन्ना राम, सनोज कुमार, गौरव कुमार, आजाद, आदर्श कुमार, अमित कुमार सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और आगे संघर्ष और भी व्यापक रूप लेगा। भारत मुक्ति मोर्चा ने सोमवार को सहरसा में विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन और रैली निकाली। यह राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए गए। रैली अंबेडकर पुस्तकालय, सहरसा से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए जिला मुख्यालय तक पहुंची। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित जनगणना कराने और ओबीसी वर्ग के साथ कथित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने केंद्र सरकार पर ओबीसी समाज के साथ धोखाधड़ी का आरोप भी लगाया। केंद्र पर ओबीसी समाज के साथ धोखाधड़ी का आरोप नेताओं ने शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण छात्र मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। हैदराबाद के छात्र रोहित वेमुला का जिक्र करते हुए ‘रोहित एक्ट’ लागू करने की मांग की गई, ताकि देशभर के शिक्षण संस्थानों में समानता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। आंदोलनकारियों ने 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की भी मांग दोहराई। उनका तर्क था कि यह नियम पुराने शिक्षकों के साथ अन्यायपूर्ण है और उन्हें इससे राहत मिलनी चाहिए। इस प्रदर्शन में भारत मुक्ति मोर्चा के प्रमंडल उप प्रभारी महेंद्र कुमार, मुन्ना राम, सनोज कुमार, गौरव कुमार, आजाद, आदर्श कुमार, अमित कुमार सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और आगे संघर्ष और भी व्यापक रूप लेगा।  

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