गयाजी में LPG संकट का असर,5 रुपए वाली चाय बंद:दुकानदारों को अब डीजल भट्टी का सहारा, कहा- रसोई गैस महंगा मिल रहा

गयाजी में LPG संकट का असर,5 रुपए वाली चाय बंद:दुकानदारों को अब डीजल भट्टी का सहारा, कहा- रसोई गैस महंगा मिल रहा

गयाजी में कामर्शियल गैस की किल्लत अब सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालने लगी है। शहर के रेस्टोरेंट, मिठाई दुकान व छोटे चाय स्टॉल संचालक परेशान हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई दुकानदारों ने 5 रुपए वाली चाय बनाना बंद कर दिया है। वहीं कई दुकानदार डीजल वाली भट्ठी के सहारे कारोबार को गति देने के मूड में हैं। दुकानदारों का साफ कहना है कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा है। मिल भी रहा है तो महंगा मिल रहा है। ऐसे में सस्ती चाय बेचकर गुजारा मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि अब कई जगहों पर डीजल भट्टी का सहारा लिया जा रहा है। शहर के मिर्जा गालिब कालेज स्थित देव होटल संचालक का कहना है कि किल्लत के बीच किसी तरह से भागदौड़ कर के कामर्शियल सिलेंडर का स्टॉक बना हुआ है। उन्होंने बताया कि समोसा, छोले भटूरे व चाय को छोड़कर सारे प्रोडक्ट कोयला भट्ठी की मदद से तैयार किया जा रहा है। फिलहाल कोई खास परेशानी नहीं है। 5 रुपए वाली चाय पूरी तरह से बंद किल्लत के पहले रोज जितना प्रोडक्ट तैयार किया जाता था। उतना ही आज भी तैयार किए जा रहे है। लेकिन इस बीच 5 रुपए वाली चाय पूरी तरह से बंद कर दी गई है। अब केवल 10 रुपए वाली चाय हमारे यहां बेची जा रही है। जब तक क्राइसिस रहेगा । तब तक यह सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि अब तक न तो किसी उत्पाद की कीमत बढ़ाई गई है और न ही उसके दाम बढ़ाए गए हैं। देव ने बताया कि 5 रुपए में चाय बेचने पर अब नुकसान हो रहा था। दूध, चीनी और गैस तीनों के दाम बढ़ गए हैं। ऐसे में मजबूरी में 5 रुपए वाली चाय बंद करनी पड़ी। पिरमंसूर रॉड स्थित बड़े होटल वंदना स्वीट्स एंड नमकीन के संचालक राहुल गुप्ता ने बताया कि फिलहाल स्थिति काबू में हैं। कामर्शियल सिलेंडर की अब तक सप्लाई जारी है। लेकिन किल्लत को देखते हुए हमने डीजल भट्ठी की तैयारी कर ली है। हमारे पास डीजल भट्ठी लेकिन उसका इस्तेमाल अभी नहीं किया गया है। क्राइसिस बड़बने पर उसकी मदद ली जाएगी। उन्होंने बताया कि कई होटल व रेस्टोरेंट संचालक के पास डीजल चूल्हा है। वे काम भी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारे यहां की हॉट सेलिंग में समोसा है। इसके प्रोडक्शन में न तो कमी की गई है और न ही इसके दाम बधाई गए हैं। ऐसा करना अभी उचित नहीं है। क्योंकि प्रोडक्शन कास्ट में अब तक वैरिएशन नहीं आया है। आगे देखा जाएगा। गैस किल्लत का सीधा असर आम लोगों पर ही पड़ रहा है। सस्ती चाय अब मिलना मुश्किल हो गया है। लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
अगर जल्द ही सप्लाई व्यवस्था ठीक नहीं हुई, तो शहर में खाने-पीने के दाम और बढ़ सकते हैं। गयाजी में कामर्शियल गैस की किल्लत अब सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालने लगी है। शहर के रेस्टोरेंट, मिठाई दुकान व छोटे चाय स्टॉल संचालक परेशान हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई दुकानदारों ने 5 रुपए वाली चाय बनाना बंद कर दिया है। वहीं कई दुकानदार डीजल वाली भट्ठी के सहारे कारोबार को गति देने के मूड में हैं। दुकानदारों का साफ कहना है कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा है। मिल भी रहा है तो महंगा मिल रहा है। ऐसे में सस्ती चाय बेचकर गुजारा मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि अब कई जगहों पर डीजल भट्टी का सहारा लिया जा रहा है। शहर के मिर्जा गालिब कालेज स्थित देव होटल संचालक का कहना है कि किल्लत के बीच किसी तरह से भागदौड़ कर के कामर्शियल सिलेंडर का स्टॉक बना हुआ है। उन्होंने बताया कि समोसा, छोले भटूरे व चाय को छोड़कर सारे प्रोडक्ट कोयला भट्ठी की मदद से तैयार किया जा रहा है। फिलहाल कोई खास परेशानी नहीं है। 5 रुपए वाली चाय पूरी तरह से बंद किल्लत के पहले रोज जितना प्रोडक्ट तैयार किया जाता था। उतना ही आज भी तैयार किए जा रहे है। लेकिन इस बीच 5 रुपए वाली चाय पूरी तरह से बंद कर दी गई है। अब केवल 10 रुपए वाली चाय हमारे यहां बेची जा रही है। जब तक क्राइसिस रहेगा । तब तक यह सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि अब तक न तो किसी उत्पाद की कीमत बढ़ाई गई है और न ही उसके दाम बढ़ाए गए हैं। देव ने बताया कि 5 रुपए में चाय बेचने पर अब नुकसान हो रहा था। दूध, चीनी और गैस तीनों के दाम बढ़ गए हैं। ऐसे में मजबूरी में 5 रुपए वाली चाय बंद करनी पड़ी। पिरमंसूर रॉड स्थित बड़े होटल वंदना स्वीट्स एंड नमकीन के संचालक राहुल गुप्ता ने बताया कि फिलहाल स्थिति काबू में हैं। कामर्शियल सिलेंडर की अब तक सप्लाई जारी है। लेकिन किल्लत को देखते हुए हमने डीजल भट्ठी की तैयारी कर ली है। हमारे पास डीजल भट्ठी लेकिन उसका इस्तेमाल अभी नहीं किया गया है। क्राइसिस बड़बने पर उसकी मदद ली जाएगी। उन्होंने बताया कि कई होटल व रेस्टोरेंट संचालक के पास डीजल चूल्हा है। वे काम भी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारे यहां की हॉट सेलिंग में समोसा है। इसके प्रोडक्शन में न तो कमी की गई है और न ही इसके दाम बधाई गए हैं। ऐसा करना अभी उचित नहीं है। क्योंकि प्रोडक्शन कास्ट में अब तक वैरिएशन नहीं आया है। आगे देखा जाएगा। गैस किल्लत का सीधा असर आम लोगों पर ही पड़ रहा है। सस्ती चाय अब मिलना मुश्किल हो गया है। लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
अगर जल्द ही सप्लाई व्यवस्था ठीक नहीं हुई, तो शहर में खाने-पीने के दाम और बढ़ सकते हैं।  

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