रांची| जेपीएससी की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा का नया परिणाम जल्द जारी किया जाएगा। आयोग ने झारखंड हाईकोर्ट को बताया है कि उत्तर पुस्तिका की दोबारा समीक्षा की प्रक्रिया चल रही है, जिसके आधार पर संशोधित रिजल्ट प्रकाशित होगा। इस मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए उसे निष्पादित कर दिया। सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोग की एसएलपी खारिज किए जाने के बाद अब पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की गई है। हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसके आधार पर नया परिणाम तैयार किया जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं संगीता कुमारी, जुली परवीन और लक्ष्मी कुमारी को ईबीसी-I और बीसी-II श्रेणी के तहत विचार किया जाएगा। यदि वे संबंधित श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करती हैं, तो उन्हें सफल घोषित किया जाएगा। दरअसल, इन अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि 24 जून 2025 के हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया। पहले जेपीएससी ने उन्हें सामान्य श्रेणी में रखते हुए अयोग्य घोषित कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने याचिका दायर की थी। अब नए परिणाम पर अंतिम निर्णय एक लंबित सिविल रिव्यू के निष्कर्ष पर भी निर्भर करेगा। रांची| जेपीएससी की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा का नया परिणाम जल्द जारी किया जाएगा। आयोग ने झारखंड हाईकोर्ट को बताया है कि उत्तर पुस्तिका की दोबारा समीक्षा की प्रक्रिया चल रही है, जिसके आधार पर संशोधित रिजल्ट प्रकाशित होगा। इस मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए उसे निष्पादित कर दिया। सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोग की एसएलपी खारिज किए जाने के बाद अब पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की गई है। हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसके आधार पर नया परिणाम तैयार किया जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं संगीता कुमारी, जुली परवीन और लक्ष्मी कुमारी को ईबीसी-I और बीसी-II श्रेणी के तहत विचार किया जाएगा। यदि वे संबंधित श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करती हैं, तो उन्हें सफल घोषित किया जाएगा। दरअसल, इन अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि 24 जून 2025 के हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया। पहले जेपीएससी ने उन्हें सामान्य श्रेणी में रखते हुए अयोग्य घोषित कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने याचिका दायर की थी। अब नए परिणाम पर अंतिम निर्णय एक लंबित सिविल रिव्यू के निष्कर्ष पर भी निर्भर करेगा।


