मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में जिला पेंशन अधिकारी की आपत्ति को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और संबंधित अधिकारियों को संशोधित पेंशन आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। मामला याचिकाकर्ता मुनेश कुमार गौतम से जुड़ा है। उन्होंने याचिका दायर कर वर्ष 1981 से 1988 तक मध्यप्रदेश विद्युत मंडल में की गई सेवा को पेंशन योग्य सेवा में जोड़ने की मांग की थी। बाद में वे पुलिस विभाग में उप निरीक्षक के रूप में नियुक्त हुए और वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त हुए। विभागीय स्तर पर उनकी मांग को सहमति मिल गई थी, लेकिन जिला पेंशन अधिकारी ने यह कहते हुए आपत्ति लगा दी कि विद्युत मंडल की सेवा को राज्य सरकार की सेवा नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी ने पूर्व सेवा से त्यागपत्र देकर विधिवत अनुमति के साथ नई सरकारी सेवा ग्रहण की है, तो उसकी पूर्व सेवा को पेंशन में जोड़ा जाएगा। अदालत ने यह भी माना कि विद्युत मंडल राज्य सरकार द्वारा गठित संस्था है और उसकी सेवा शर्तें भी सरकार द्वारा निर्धारित होती थीं, इसलिए उसे पेंशन योग्य सेवा माना जाएगा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि चयन प्रक्रिया के समय पूर्व नियोक्ता की अनुमति दी गई थी और करीब 30 वर्षों की सेवा के बाद इस पर सवाल उठाना उचित नहीं है। अंततः हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि 15 जनवरी 1988 तक की सेवा को जोड़कर संशोधित पेंशन प्रकरण तैयार किया जाए।


