Iran War News: मिडिल ईस्ट में युद्ध खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं। ये हमले इजराइल द्वारा ईरान के गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों के जवाब में हुए, जिससे क्षेत्रीय युद्ध के और बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। ईरान के हमले का निशाना रास लफान था, जो दुनिया का सबसे बड़ा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात केंद्र है। यह 48 घंटे में दूसरा हमला है। बुधवार को मिसाइलों ने पर्ल गैस-टू-लिक्विड्स (GTL) फैसिलिटी को नुकसान पहुंचाया था। गुरुवार को QatarEnergy ने पुष्टि की कि कई LNG सुविधाओं को फिर निशाना बनाया गया, जिससे व्यापक नुकसान हुआ है।
कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि 18 मार्च 2026 को हुए हमले के बाद, 19 मार्च की सुबह फिर कई LNG प्लांट्स को निशाना बनाया गया। कतर ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। अधिकारियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा व पर्यावरण के लिए सीधा खतरा बताया। यह बढ़ता तनाव पहले से जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा कर सकता है।
रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी क्या है?
रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी कतर का प्रमुख LNG उत्पादन और गैस प्रोसेसिंग केंद्र है, जहां दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यात प्लांट स्थित है। इस परिसर में कई बड़े प्लांट हैं, जैसे: पर्ल GTL और ORYX GTL प्लांट, QatarEnergy के LNG प्लांट, डॉल्फिन गैस प्रोसेसिंग प्लांट, लफ्फान रिफाइनरी, बिजली और पानी के एकीकृत संयंत्र। यह दोहा से करीब 80 किलोमीटर उत्तर में स्थित है और लगभग 295 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां का बंदरगाह करीब 4,500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, जो दुनिया का सबसे बड़ा कृत्रिम बंदरगाह माना जाता है।
इस सप्ताह की शुरुआत में पर्ल GTL प्लांट ने बढ़ते तनाव के कारण उत्पादन बंद कर दिया था। हालिया हमले में कम से कम पांच मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से एक ने भारी नुकसान पहुंचाया और बाद में आग लग गई, जिसे नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
रास लफान को हुआ नुकसान दक्षिण एशिया के देशों- भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि ये देश कतर से LNG आयात पर काफी निर्भर हैं। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों में जल्द ही बिजली कटौती और उद्योगों में धीमापन देखने को मिल सकता है। भारत अपनी लगभग 40% LNG जरूरतें कतर से पूरी करता है। अगर आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो गैस की कमी हो सकती है। ऊर्जा कीमतें बढ़ सकती हैं। बिजली कटौती हो सकती है और उद्योगों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
Kpler के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई में झटका वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अस्थिरता पैदा कर सकता है, जो पहले से ही इस युद्ध के कारण प्रभावित है।


