Legionnaires Disease: दुनिया के कई बड़े शहरों में एक बार फिर एक खतरनाक बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है, लेजियोनेयर्स डिजीज। London और New York City जैसे शहरों में इसके केस अचानक बढ़े हैं, जिनमें कई लोग बीमार हुए और कुछ की मौत भी हो गई।
क्या है लेजियोनेयर्स डिजीज?
यह एक तरह का गंभीर निमोनिया (फेफड़ों का इंफेक्शन) है, जो Legionella pneumophila नाम के बैक्टीरिया से होता है। खास बात यह है कि यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलती। यह तब होती है जब हम हवा में मौजूद पानी की बहुत छोटी-छोटी बूंदों (ड्रॉपलेट्स) को सांस के जरिए अंदर लेते हैं, जिनमें यह बैक्टीरिया मौजूद होता है। ये बैक्टीरिया अक्सर AC सिस्टम, कूलिंग टावर, फाउंटेन और पानी की टंकियों में पनपते हैं।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि शहरों में बढ़ती इमारतें, पुराने पानी के सिस्टम और बढ़ता तापमान इस बीमारी के फैलने की बड़ी वजह बन रहे हैं। गर्म और रुका हुआ पानी इस बैक्टीरिया के लिए सबसे अच्छा माहौल होता है।
क्या हैं इसके लक्षण?
इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर 2 से 14 दिन के अंदर दिखते हैं, जैसे-
- तेज बुखार और ठंड लगना
- लगातार खांसी
- सांस लेने में तकलीफ
- मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द
- गंभीर हालत में उल्टी या कन्फ्यूजन
- अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा भी हो सकती है।
हालिया मामलों से क्या सीख मिली?
हाल के मामलों में पाया गया कि कई जगहों पर कूलिंग टावर और पानी के सिस्टम ठीक से साफ नहीं किए गए थे। खासकर न्यूयॉर्क में कई बिल्डिंग्स के कूलिंग टावर में यह बैक्टीरिया मिला। इससे साफ है कि यह बीमारी रोकी जा सकती है, बस पानी के सिस्टम की सही देखभाल जरूरी है।
भारत में कितना खतरा?
भारत में अभी बड़े स्तर पर इसके केस कम हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह बीमारी कम रिपोर्ट होती है। हमारे यहां तेजी से बढ़ते शहर, भीड़भाड़, पुराने पाइपलाइन सिस्टम और गर्म मौसम इसे बढ़ावा दे सकते हैं। खासतौर पर अस्पताल, होटल और बड़ी सोसाइटीज में खतरा ज्यादा हो सकता है अगर पानी की टंकियां और AC सिस्टम साफ न रखे जाएं।
बचाव कैसे करें?
- पानी की टंकियों और AC सिस्टम की नियमित सफाई करें
- पानी को जमा न होने दें
- गर्म पानी को 60°C से ऊपर रखें
- बड़े बिल्डिंग्स में समय-समय पर जांच जरूरी है
आसपास के माहौल से जुड़ी बीमारी
लेजियोनेयर्स डिजीज भले ही सीधे एक व्यक्ति से दूसरे में न फैलती हो, लेकिन यह हमारे आसपास के माहौल से जुड़ी बीमारी है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो यह बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए साफ-सफाई और सही मेंटेनेंस ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।


