लंबी दूरी तक सटीक निशाने की क्षमता का प्रदर्शन, बना युद्ध जैसा माहौल
सीमावर्ती जैसलमेर जिले में फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना ने दिन के उजाले और रात के अंधेरे में अपने रॉकेट से गर्जना के साथ लक्ष्यों पर सटीक निशाने लगा कर शक्ति प्रदर्शन किया।
सेना ने बैटलफील्ड थंडर अभ्यास के जरिए अपनी रॉकेट आर्टिलरी की ताकत का परीक्षण किया और इस मौके पर पिनाका और बीएम-21 ग्रेड जैसे आधुनिक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चरों ने गडगड़़ाहट के बीच सटीक और तीव्र अंदाज में किए हमलों से मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। थंडर विथ प्रिसिसन यानी सटीकता के साथ गडगड़़ाहट ध्येय वाक्य को सेना के पराक्रमी जवानों ने मरुभूमि में यथार्थ कर दिखाया। थार के आसमान में एक साथ कई रॉकेट दागे गए, जिससे पूरे क्षेत्र में सेना की ताकत का अहसास हुआ।
स्वदेशी पिनाका ने दिखाई ताकत
स्वदेश में निर्मित पिनाका ने अपनी ताकत व क्षमता का खुल कर प्रदर्शन किया। यह 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकती है और 40 से 75 किमी दूर लक्ष्य को निशाना बना सकती है। ऐसे ही कम समय में भारी गोलाबारी करने के लिए जग विख्यात बीएम-21 ग्रेड प्रणाली ने बताया कि वह दुश्मन के बड़े इलाके को एक साथ तबाह कर सकती है।
फायर पावर एक्सरसाइज में लंबी दूरी तक वार क्षमता का आंकलन
रेंज में हुए इस अभ्यास के दौरान सैनिकों ने तेज धूप और उड़ती धूल के बीच लगातार प्रशिक्षण लिया। इसका मुख्य आकर्षण लंबी दूरी के लक्ष्यों को पूरी सटीकता से ध्वस्त करना रहा। अभ्यास के दौरान ड्रोन और सर्विलांस सिस्टम के साथ रॉकेट लॉन्चरों के तालमेल का भी परीक्षण किया गया। एक साथ दागे गए रॉकेटों की गूंज लम्बी दूरी तक सुनाई दी।
सेना की तैयारी पूरी
भारतीय सेना ने इस अभ्यास से एक बार फिर अपनी पूरी तैयारी का प्रमाण दिया, साथ ही यह भी दिखाया कि सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट अब लगातार आधुनिक तकनीक के मेल से मजबूत हो रही है। इसके साथ मिसाइल फोर्स, लोइटरिंग मुनिशन (सुसाइड ड्रोन) और एडवांस सर्विलांस सिस्टम पर भी काम किया जा रहा है। जानकारों के अनुसार रेगिस्तानी इलाकों में एक साथ पूरी क्षमता से हमला किया जाना सबसे प्रभावी दृश्य होता है।


