नालंदा के रहुई प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, मल्लीचक को शिक्षा विभाग की ओर से दूसरे गांव (रामपुर या काजीचक) शिफ्ट करने का आदेश दिया है। जिसके बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पिछले 12 साल से यह स्कूल गांव के ही पंचायत (सामुदायिक) भवन में चल रहा है। भवनहीन होने के कारण विभाग ने इसे स्थानांतरित करने का फैसला लिया है, लेकिन ग्रामीण इसके सख्त खिलाफ हैं। ग्रामीणों-अभिभावकों ने कह दिया है कि वे अपने छोटे-छोटे बच्चों को जान जोखिम में डालकर दूसरे गांव पढ़ने नहीं भेजेंगे। उनकी मांग है कि गांव में ही स्कूल का अपना भवन बनाया जाए। मुख्य सड़क पार करने में हादसे का डर गांव के निशांत कुमार, शिव कुमार प्रसाद और वार्ड सदस्य ने बताया कि मल्लीचक से रामपुर स्कूल की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। वहां जाने के लिए छोटे बच्चों को मुख्य सड़क पार करनी पड़ेगी, जहां हमेशा तेज रफ्तार गाड़ियां चलती हैं। इससे किसी भी वक्त हादसे की आशंका बनी रहेगी। बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? महिला अभिभावक मंजू देवी और रसोइया ने भी स्पष्ट कहा कि वे किसी भी कीमत पर बच्चों को दूसरे गांव नहीं भेजेंगी। ग्रामीणों का यह भी तर्क है कि दूसरे गांव जाने पर बच्चों के बीच आपसी विवाद या झगड़े भी हो सकते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के पास ही जमीन उपलब्ध है, सरकार को वहीं जल्द से जल्द स्कूल भवन का निर्माण कराना चाहिए।
एचएम का तर्क, वहां भी मात्र तीन कमरे, कैसे होगी पढ़ाई? स्कूल की प्रधान शिक्षिका (एचएम) प्रीति राज ने बताया कि वर्तमान पंचायत भवन में 70-75 बच्चों को पढ़ाने में भारी दिक्कत हो रही है। जगह की कमी के कारण बच्चों को कड़ी धूप में बैठना पड़ता है। इस नजरिए से सरकार का शिफ्टिंग का फैसला ठीक लगता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस रामपुर स्कूल में शिफ्ट करने की बात हो रही है, वहां के एचएम से उनकी बात हुई है। रामपुर स्कूल में भी मात्र 3 कमरे हैं और वहां पहले से ही 50-60 बच्चे नामांकित हैं। ऐसे में 75 नए बच्चों के लिए मात्र एक कमरा मिलेगा, जिसमें सभी बच्चों को व्यवस्थित करना पूरी तरह से असंभव है।
ग्राम सभा में लिया जाएगा अंतिम निर्णय प्रधान शिक्षिका ने बताया कि गांव में अभिभावकों के साथ एक ‘आम सभा’ (ग्राम सभा) बुलाई गई है। इस सभा में स्कूल शिफ्टिंग को लेकर अभिभावकों से उनका मंतव्य लिया जाएगा। ग्राम सभा में जो भी सर्वसम्मति से निर्णय या प्रस्ताव पारित होगा, उसे लिखित रूप में शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा, ताकि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला लिया जा सके। नालंदा के रहुई प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, मल्लीचक को शिक्षा विभाग की ओर से दूसरे गांव (रामपुर या काजीचक) शिफ्ट करने का आदेश दिया है। जिसके बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पिछले 12 साल से यह स्कूल गांव के ही पंचायत (सामुदायिक) भवन में चल रहा है। भवनहीन होने के कारण विभाग ने इसे स्थानांतरित करने का फैसला लिया है, लेकिन ग्रामीण इसके सख्त खिलाफ हैं। ग्रामीणों-अभिभावकों ने कह दिया है कि वे अपने छोटे-छोटे बच्चों को जान जोखिम में डालकर दूसरे गांव पढ़ने नहीं भेजेंगे। उनकी मांग है कि गांव में ही स्कूल का अपना भवन बनाया जाए। मुख्य सड़क पार करने में हादसे का डर गांव के निशांत कुमार, शिव कुमार प्रसाद और वार्ड सदस्य ने बताया कि मल्लीचक से रामपुर स्कूल की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। वहां जाने के लिए छोटे बच्चों को मुख्य सड़क पार करनी पड़ेगी, जहां हमेशा तेज रफ्तार गाड़ियां चलती हैं। इससे किसी भी वक्त हादसे की आशंका बनी रहेगी। बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? महिला अभिभावक मंजू देवी और रसोइया ने भी स्पष्ट कहा कि वे किसी भी कीमत पर बच्चों को दूसरे गांव नहीं भेजेंगी। ग्रामीणों का यह भी तर्क है कि दूसरे गांव जाने पर बच्चों के बीच आपसी विवाद या झगड़े भी हो सकते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के पास ही जमीन उपलब्ध है, सरकार को वहीं जल्द से जल्द स्कूल भवन का निर्माण कराना चाहिए।
एचएम का तर्क, वहां भी मात्र तीन कमरे, कैसे होगी पढ़ाई? स्कूल की प्रधान शिक्षिका (एचएम) प्रीति राज ने बताया कि वर्तमान पंचायत भवन में 70-75 बच्चों को पढ़ाने में भारी दिक्कत हो रही है। जगह की कमी के कारण बच्चों को कड़ी धूप में बैठना पड़ता है। इस नजरिए से सरकार का शिफ्टिंग का फैसला ठीक लगता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस रामपुर स्कूल में शिफ्ट करने की बात हो रही है, वहां के एचएम से उनकी बात हुई है। रामपुर स्कूल में भी मात्र 3 कमरे हैं और वहां पहले से ही 50-60 बच्चे नामांकित हैं। ऐसे में 75 नए बच्चों के लिए मात्र एक कमरा मिलेगा, जिसमें सभी बच्चों को व्यवस्थित करना पूरी तरह से असंभव है।
ग्राम सभा में लिया जाएगा अंतिम निर्णय प्रधान शिक्षिका ने बताया कि गांव में अभिभावकों के साथ एक ‘आम सभा’ (ग्राम सभा) बुलाई गई है। इस सभा में स्कूल शिफ्टिंग को लेकर अभिभावकों से उनका मंतव्य लिया जाएगा। ग्राम सभा में जो भी सर्वसम्मति से निर्णय या प्रस्ताव पारित होगा, उसे लिखित रूप में शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा, ताकि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला लिया जा सके।


