Xi Jinping book Burning: नेपाल में जिनपिंग की किताबों की हजारों प्रतियां जलाईं, चीन ने दर्ज कराया विरोध

Xi Jinping book Burning: नेपाल में जिनपिंग की किताबों की हजारों प्रतियां जलाईं, चीन ने दर्ज कराया विरोध

Xi Jinping: नेपाल के मोरंग इलाके में मनमोहन तकनीकी कॉलेज में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की लिखी हुई किताब ‘द गवर्नेंस ऑफ चाइना’ की हजारों प्रतियां जलाए जाने से बवाल मच गया है। शनिवार रात को हुई इस घटना पर चीन ने बहुत कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। इस घटना पर चीन के नेपाल में दूतावास ने नेपाली विदेश मंत्रालय को एक जुबानी नोट भेजा है। साथ ही अनुरोध किया है कि इस घटना में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

ओली से जुड़ा है कॉलेज

मामले से परिचित अधिकारियों के अनुसार, मोरंग जिला प्रशासन और कोशी प्रांतीय पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। एक वीडियो क्लिप में मनमोहन टेक्निकल कॉलेज के अंदर कुछ लोग चीनी राष्ट्रपति की किताब समेत कई किताबें और दस्तावेज जलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि क्यों एक टेक्निकल कॉलेज के अंदर शी जिनपिंग की किताबों को इतनी बड़ी संख्या में रखा गया था। स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। इस कॉलेज को पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली से जुड़ा बताया जा रहा है।

गृहमंत्री ने दिया दखल

वीडियो वायरल होने के बाद, गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्यल ने मीडिया को बताया कि हमने मोरंग के स्थानीय अधिकारियों को मामले की जांच करने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने पुष्टि की कि चीन ने रविवार को विदेश मंत्रालय को एक मौखिक सूचना भेजी थी। नेपाल के विदेश और गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि चीन ने हाल के अन्य घटनाक्रमों पर भी चिंता व्यक्त की है, जिनमें रिनपोचे (तिब्बती आध्यात्मिक नेता) की काठमांडू यात्राएं शामिल हैं। चीन के अनुरोध पर, सरकार ने पिछले महीने एक रिनपोचे को नेपाल आने की अनुमति देने से इंकार भी कर दिया था।

टेलिकम्यूनिकेशन बिलिंग टेंडर रद्द

उन्होंने कहा कि इसी तरह, चीन ने पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे परियोजना से जुड़े भ्रष्टाचार मामले जैसे घटनाक्रमों पर भी चिंता व्यक्त की है, जिसमें चीनी कंपनियां शामिल हैं और टेलिकम्यूनिकेशन बिलिंग टेंडर को रद्द करने और चीनी फर्म हुआवेई से जुड़े 5जी अनुबंधों पर निर्णयों सहित अन्य मुद्दों पर भी चिंता जताई है। वहीं, सोशल मीडिया पर सवाल पूछे जा रहे हैं कि आखिर जिनपिंग की यह बड़ी मात्रा में किताबें क्यों खरीदी गई थीं और इनका क्या उपयोग हो रहा था?

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