वाराणसी का काशी हिंदू विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल, शुक्रवार को यहां सर्जरी डिपार्टमेंट की एक लेडी जूनियर रेजिडेंट-1 ने इंसुलिन की अधिक डोज लेकर सुसाइड का प्रयास किया था। गंभीर स्थिति में वह पिछले चार दिनों से भर्ती है और इलाज चल रहा है। उसके साथियों ने सीनियरों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इसके बाद JR-1 IMS के मेन गेट पर धरने पर बैठ गए थे उनका आरोप है कि जूनियर रेजिडेंट्स-1 का उत्पीड़न होता है, इसके लिए कोई एक नहीं बल्कि पूरा सिस्टम जिम्मेदार है। इसलिए पूरा सिस्टम बदलने की जरूरत है। उधर, देर रात तक हुई आईएमएस प्रशासन की बैठक में छात्रों के मुद्दों को लेकर अहम बैठक हुई। इसमें चार अहम मांगों पर सहमति जताई गई । बैठक डायरेक्टर एसएन संखवार की अध्यक्षता में हुई। ये मांगे जिसें आईएमएस प्रशासन ने माना .रेजिडेंट डॉक्टरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की नेशनल टास्क फोर्स सिफारिशों के अनुसार, रेज़िडेंट डॉक्टरों से सप्ताह में 74 घंटे से अधिक कार्य नहीं लिया जाएगा और एक बार में 24 घंटे से अधिक ड्यूटी नहीं होगी। •अस्पताल की कैंटीन सुविधाओं को और बेहतर बनाया जाएगा। •हॉस्टलों के प्रभावी प्रबंधन में सहयोग के लिए विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। •विभागों में विश्राम एवं अन्य अवकाश गतिविधियों के लिए उचित स्थान की पहचान की जाएगी।
अब पढ़िए क्या कहते हैं JR ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत के दौरान डॉ. अतुल ने कहा, “हमारे साथी के साथ जो घटना हुई है, उससे हम सभी बहुत आहत हैं। हम उसके लिए न्याय की मांग करते हैं। हम चाहते हैं कि इस तरह की घटना दोबारा किसी साथी के ना हो, इसके लिए हम जिम्मेदार अफसरों से मांग कर रहे हैं।” डॉ. ध्रुव कहते हैं, “हमारे साथी के साथ जो घटना हुई है उसे रोका भी जा सकता था। हम चाहते हैं कि आगे किसी साथी के साथ इस तरह की घटना न हो इसके लिए हम लोगों ने डायरेक्टर के समक्ष कुछ मांगें रखी हैं, इसके लिए लिखित में हमें आश्वासन मिला है” डॉ. संजीवनी ने कहा, “इस घटना के लिए पूरा सिस्टम जिम्मेदार है, खासकर वो लोग जिन्होंने इस तरह का कदम उठाने के लिए हमारी साथी को मजबूर किया। यहां पर जो भी ज्वाइन करता है जेआर-1 वह सफर करता है, इसलिए पूरा सिस्टम जिम्मेदार है, इसलिए पूरा चेंज होना चाहिए। ” डॉ. अनंत ने कहा, “हम लोगों की डायरेक्टर के साथ वार्ता हुई है। कुछ मांगों पर उन्होंने सहमति दी है लेकिन हम लोग मांग करते हैं इसका शत प्रतिशत अनुपालन किया जाए और सभी मांगों पर विचार किया जाए।” कई दिनों से परेशान थी जूनियर रेजिडेंट इंसुलिन की अत्याधिक डोज लेकर आत्मघाती कदम उठाने वाली जूनियर रेजिडेंट कई दिनों से परेशान थी। यही कारण है कि वह अपने परिवार वालों से भी बातचीत नहीं कर रही थी। दोस्तों से भी बहुत ज्यादा बातें नहीं हो रही थी। हालांकि वह अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही है। उसका मोबाइल फोन BHU प्रशासन ने अपने कब्जे में लिया है, ताकि पुलिस के जरिए उससे कुछ पता लगाया जा सके। IMS के निदेशक प्रो. एसएन संखवार का कहना है कि यह घटना दुख:द है। इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। जूनियर डाक्टरों की यह है मांग


