Mumtaz on Hinduism: 90 के दशक की दिग्गज एक्ट्रेस मुमताज ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी आध्यात्मिकता और अंतरधार्मिक विवाह को लेकर चुप्पी तोड़ी है। बता दें, पहले मुमताज का असली नाम मुमताज असकारी था और उन्होंने 1970 के दशक में ‘तेरे मेरे सपने’ और ‘रोटी’ जैसी फिल्मों में काम कर बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई। 1974 में उन्होंने बिजनेसमैन मयूर माधवानी से शादी कर फिल्मों से दूरी बना लिया।
लव जिहाद और हिन्दू- मुस्लिम शादी को लेकर अपने विचार व्यक्त किए
अब एक्ट्रेस मुमताज ने लव जिहाद और हिन्दू- मुस्लिम शादी को लेकर अपनी आध्यात्मिक मान्यताओं के बारे में बात करते हुए ने कहा कि वे जन्म से मुस्लिम हैं, लेकिन उन्हें हिंदू देवी-देवताओं में भरोसा है। उन्होंने बताया, “मेरे प्रिय भगवान शंकर और भगवान कृष्ण हैं। मैं मुस्लिम होते हुए भी उनकी पूजा करती हूं।” मुमताज ने बताया कि उनके घर पर धार्मिक अनुष्ठान नियमित होते हैं और जब भी वो घर की सीढ़ियों से नीचे उतरती हैं, तो वो भगवान गणेश की मूर्ति के सामने प्रणाम करती हैं। उन्हें भगवान शंकर बहुत पसंद हैं क्योंकि भगवान शंकर सबसे सुंदर हैं।
इतना ही नहीं, इंटरव्यू में मुमताज ने अपने और अपनी बहन के अंतरधार्मिक विवाह पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि दोनों बहनें हिंदू पुरुषों से शादी कर खुशहाल जीवन बिता रही हैं। मुमताज ने आगे कहा, “हम दोनों ही दोनों धर्मों में विश्वास रखती हैं। मेरे पति मेरा बहुत ख्याल रखते हैं। मुझे समझ नहीं आता कि लोग हिंदू-मुस्लिम विभाजन की बातें क्यों करते हैं। मैं इस बात पर विश्वास नहीं करती।”
मुसलमानों से हिंदू बेहतर होते हैं महिलाओ का अधिकार समझते है
एक्ट्रेस मुमताज ने मुस्लिम पुरुषों में प्रचलित बहुविवाह प्रथा की भी आलोचना की। उन्होंने इसे गलत बताया और कहा कि कई मुस्लिम पुरुष एक से ज्यादा शादी करके अपनी पत्नियों को छोड़ देते हैं, जो सही नहीं है ये उन सभी महिलाओ के लिए दुखद है। साथ ही, उन्होंने कहा, “किसी को 3-4 बार शादी नहीं करनी चाहिए। रिश्ते में महिलाएं भी अधिकार जताती हैं। एक पत्नी को छोड़कर दूसरी से शादी करना सही नहीं, ये पाप है।”
बता दें, इसके मुकाबले मुमताज ने हिंदू समुदाय की विवाह प्रथाओं की भी तारीफ की है और उनका कहना था कि हिंदू आमतौर पर एक ही शादी करते हैं, कभी-कभी 2 बार, लेकिन वे आसानी से अपने रिश्ते को छोड़कर नए रिश्ते में नहीं जाते। उन्होंने इस सिलसिले में कहा, ” मुसलमानों से हिंदू बेहतर होते हैं क्योंकि वे अपने परिवार का साथ हमेशा निभाते हैं।”


