‘बचपन से ही मां ने एक चीज दिल में डाली थी की अधिकारी बनना है। UPSC क्रेक करना है, तो उसी समय से दिल में इस बात को ठाना था कि मां का सपना पूरा करना है। बस इसी के साथ तैयारी शुरू की। उस समय इंटर में थी और कोरोना काल था। ‘ ‘लाॅकडाउन में मैंने UPSC की तैयारी शुरू की पर पहले अटेम्प्ट में नहीं हुआ तो सोचा की शायद हमारे लिए यह परीक्षा नहीं बनी पर दूसरे अटेम्प्ट में भी नहीं हुआ लेकिन तीसरे मुझे 453वीं रैंक मिली है। अब लगता है मां का सपना पूरा कर सकी।’ ये कहना है वाराणसी के महेशपुर के रहने वाले रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर अरुण पाठक की तीन बेटियों और एक बेटे में में सबसे छोटी बेटी शिक्षा पाठक का; शिक्षा ने UPSC परीक्षा में हाल ही में आये रिजल्ट में 453वीं रैंक हासिल कर दो जिलों का नाम रौशन किया है। साल 2009 से वाराणसी में रह रहे रिटयर्ड सब इन्स्पेक्टर अरुण पाठक मूल रूप से बलिया के दोआबा क्षेत्र के रहने वाले हैं। लेकिन बेटी ने वाराणसी से ही परीक्षा दी थी। ऐसे में इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दैनिक भास्कर ने वाराणसी की होनहार और मेधावी शिक्षा पाठक से उनकी UPSC की तैयारियों और उनकी सफलता को जाना; साथ ही उनकी मां और बहनों से भी बात किया। पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए UPSC में 453वीं रैंक लाने वाली शिक्षा पाठक से उनकी सफलता की कहानी… वाराणसी के मंडुआडीह थानाक्षेत्र के महेशपुर में साल 2009 में घर बनवाने वाले यूपी पुलिस से रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर अरुण पाठक और उनकी पत्नी शीला पाठक के चार बच्चे हैं। एक बेटे और तीन बेटियां जिसमें शिक्षा पाठक सबसे छोटी हैं। महेशपुर स्थित अरुण पाठक के मकान जब हम पहुंचे तो वो हमारा इंतजार ही कर रहे थे। दरवाजे पर मिले और कहा – आइये आप का ही इंतजार था। आज दोपहर में सोया भी नहीं की आप लोग आ रहे हैं। घर के अंदर खुशी का माहौल था। टेबल पर मिठाइयां और उनके डिब्बे रखे थे। शिक्षा की मां और बहनों के चेहरे से खुशी झलक रही थी। पर शिक्षा के मन में अभी भी एक द्वन्द चल रहा था। हमने शिक्षा और उसकी मां और बहन से बात की और शिक्षा की सफलता की कहानी जानी। लॉकडाउन से घर में शुरू की पढ़ाई शिक्षा पाठक पहले तो संकुचाई पर फिर एक अधिकारी की तरह सभी सवालों के जवाब दिए। शिक्षा ने बताया – मम्मी का सपना था जिसे आअज मैंने पूरा किया है। मम्मी स्कूल टाइम से ही कहती थी की बेटा आप को यूपीएससी क्रेक करना है। पहले उनकी बातों को कभी सीरियस नहीं लिया। बात उस वक्त की है जब कोरोना काल आया और मै इंटर सेकेंड ईयर में थी। लॉकडाउन में मैंने UPSC की पढ़ाई घर में ही शुरू कर दी। तीसरे अटेम्प्ट में मिली रैंक शिक्षा ने बताया – पहली बार जब मैंने UPSC परीक्षा दी थी। उस वक्त मेरी उम्र काफी कम थी। मैंने साल 2023 में UPSC का दिया पर प्रीलिम्स नहीं निकला। उसके बाद 2024 में फिर दिया तब 13 नंबर से रुक गया। इसके बाद साल 2025 में तीसरे अटेम्प्ट में मुझे 453वीं रैंक मिली है और अब मुझे लगता है कि मां के सपने को पूरा कर पाई हूं। सेल्फ स्टडी से हासिल किया मुकाम शिक्षा ने बताया – मैंने यह तय किया था कि हम दिल्ली जाकर तैयारी न करके सेल्फ स्टडी से ही पढ़ाई करेंगे। इसके बाद UPSC का एग्जाम देंगे। हमने अपनी फाउंडेशन सेल्फ स्टडी से करनी थी। इसलिए हमने लॉकडाउन में ही पढ़ाई स्टार्ट कर दी थी। क्योंकि उस वक्त हमारे पास काफी समय था। तो हमने उसी समय शुरू कर दिया क्योंकि कॉलेज भी ऑफलाइन नहीं बल्कि ऑनलाइन थे। एजुकेशन और वीमेन डेवलेपमेंट फिल्ड में करना चाहती है काम शिक्षा पाठक ने बताया – एग्जाम क्रेक करने के बाद थोड़ा रिलीफ लग रहा है। हम आगे अपनी रैंक बेहतर करने के लिए फिर पढ़ाई करेंगे। लेकिन अगर इस रैंक से हमें कोई पद मिलता है तो हम एजुकेशन और वीमेन डेवलेपमेंट पर कार्य करना चाहेंगे। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और बहनों को दिया। पहली बार के बाद छोड़ दिया था मन शिक्षा ने बताया – मैंने UPSC के लिए इलिजिबल होने के पहले से पढ़ाई शुरू कर दी। पहले अटेम्प्ट में जब नहीं हुआ तो मुझे लगा कि शायद ये पढ़ाई हम लोगों के लिए नहीं बनी है। पर मेरी मां और भाई-बहनों ने सपोर्ट किया। इसके बाद सेकेंड अटेम्प्ट में जब करीब पहुंची तो विश्वास आया और आज उसका परिणाम सामने है। घर का हमेशा मिला सहयोग, भतीजा-भतीजी खास शिक्षा ने बताया – पढ़ाई के दौरान कई बार स्ट्रेस भी आया पर मेरे भतीजे और भतीजी ने वो स्ट्रेस छूमंतर कर दिया। इसके आलावा मेरी मां, भाई और दोनों बहनों ने हर समय मेरा सपोर्ट किया और मुझे भरोसा दिलाया कि मै पास हो जाऊंगी जिसके दम पर मै आगे बढ़ गई। सेल्फ स्टडी पर ज्यादा करें फोकस UPSC के थर्ड अटेम्प्ट में क्रेक करने वाली शिक्षा ने तैयारी कर रहे लोगों को टिप्स देते हुए कहा – लोगों को जो अभी भी तैयारी कर रहे हैं। वो कन्सेंसटेन्सी बनाए रखें। वो काफी ज्यादा जरूरी है। इसके अलावा सेल्फ स्टडी मस्ट है। बिना उसके आगे बढ़ पाना संभव नहीं है। अब जानिए शिक्षा की मां और बड़ी बहन ने क्या बताया? मोहल्ले और समाज को क्या दिया जवाब?… परिवार और समाज का मुंह किया बंद बेटी की सफलता से सबसे अधिक उनकी मां शीला पाठक खुश दिखीं। शिला ने कहा – आज मेरी बेटी ने UPSC क्रेक करके परिवार और समाज के उन लोगों का मुंह बंद कर दिया जो लोग कहते थे कि खाना बनाना सिखाओ। बेटियां खाना नहीं बनाएंगी तो परिवार कैसे चलाएंगी पर आज शिक्षा ने मेरा सपना पूरा कर दिया है। उसने अपनी रैंक से परिवार और समाज का मुंह बंद कर दिया है। कभी नहीं कहा खाना बनाओ शीला ने बताया- मेरी तीन बेटियां हैं; रौशनी, दीक्षा और शिक्षा। रौशनी बीएचयू से पीएचडी कर रही। इसके अलावा दीक्षा और शिक्षा UPSC की तैयारी कर रही हैं। लेकिन कभी आज तक मैंने अपनी बेटियों को खाना बनाने के लिए नहीं कहा। सब मैं करती हूं। लड़कियां सिर्फ चाय बना लेती हैं। जब खाना बनाने की आवश्यकता होगी तो वो भी सीख लेंगी और अफसर बन गयी तो उसकी भी कोई जरूरत नहीं। जहां जाएंगी वहां उन्हें खाना बनाने वाले भी मिलेंगे। किताबों से है दोस्ती और प्यार शिक्षा की बड़ी बहन दीक्षा ने बताया – शिक्षा बचपन से ही बहुत मेहनती रही है। कभी उसने स्कूल या बाहर कोई दोस्त नहीं बनाया। स्कूल या कालेज में भी खाली समय में लाइब्रेरी में ही गुजारा और कह सकते हैं कि किताबों से ही उसे दोस्ती और प्यार है। आज पूरा परिवार बहुत खुश है। और ये सिर्फ उसकी वजह से है तो वो डिजर्व करती है हर चीज।


