टेक्सटाइल हब भीलवाड़ा की नई उड़ान: विदेशी यूनिवर्सिटीज के साथ 4 एमओयू

टेक्सटाइल हब भीलवाड़ा की नई उड़ान: विदेशी यूनिवर्सिटीज के साथ 4 एमओयू

टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा के औद्योगिक विकास को अब नए पंख लगने वाले हैं। केंद्र सरकार की पीएम मित्र योजना के तहत भीलवाड़ा में जल्द ही एक मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जाएगा। रूपाहेली क्षेत्र में 221 करोड़ रुपए की लागत से टेक्सटाइल पार्क का विकास कार्य प्रगति पर है। यह बात सांसद दामोदर अग्रवाल ने एमएलवी टेक्सटाइल व इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में कही।

‘इनोवेटिव एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स’ विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में भीलवाड़ा के वस्त्र उद्योग को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई बड़े फैसले हुए। शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए कॉलेज प्रशासन ने यूरोप के चार अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

पारंपरिक से तकनीकी वस्त्रों की ओर बढ़ने का समय

कार्यशाला में आईआईटी दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर व द टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज भिवानी के डायरेक्टर प्रोफेसर बीके बेहरा ने स्मार्ट टेक्सटाइल्स, उन्नत फाइबर और कम्पोजिट्स पर नवीनतम शोध प्रस्तुत किए। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में भारत में तकनीकी वस्त्रों का अनुपात अभी काफी कम है। नवाचार के माध्यम से इस खाई को पाटा जा सकता है। उद्योगपति दिनेश नोलखा ने भी अर्थव्यवस्था में तकनीकी वस्त्रों के बढ़ते महत्व और इसके लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रिसर्च और इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा के कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी ने विद्यार्थियों को तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में ज्ञानार्जन कर भारत में इसके विकास का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कॉलेज में शैक्षणिक उत्कृष्टता और तकनीकी नवाचार के लिए विश्वविद्यालय की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविन्द वशिष्ठ ने स्वागत उद्बोधन में तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और अनुसंधान की जरूरत पर प्रकाश डाला। संचालन रीना भटनागर ने किया और अंत में डॉ. हर्षवर्धन सारस्वत ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला न केवल कॉलेज, बल्कि पूरे राजस्थान के टेक्सटाइल उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

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