परंपरा या लापरवाही? विरार से लोकल ट्रेन में लादकर माहिम ले गए ‘पेड़’, वीडियो वायरल होते ही कार्रवाई शुरू

परंपरा या लापरवाही? विरार से लोकल ट्रेन में लादकर माहिम ले गए ‘पेड़’, वीडियो वायरल होते ही कार्रवाई शुरू

देशभर में होली का त्योहार बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। कई जगहों पर होली मनाने की परंपराएं भी अलग-अलग रूप में देखने को मिलती हैं। कहीं लठमार होली खेली जाती है, कहीं जूता मार होली, तो कहीं लोग रंगों की जगह फूलों की होली खेलते हैं।

इसी तरह मुंबई में भी एक अनूठी परंपरा देखने को मिलती है। मुंबई के माहिम इलाके में होली अलग ही तरीके से मनाई जाती है। यहां होलिका दहन के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ियां खास तौर पर विरार से लाई जाती हैं। इसी खास परंपरा के तहत, इस वर्ष होलिका दहन के लिए मुंबई लोकल ट्रेन से विरार से माहिम तक एक पेड़ का तना ले जाया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया।  

मामला दर्ज?

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि होलिका दहन के लिए पेड़ का एक बड़ा तना विरार से माहिम जाने वाली लोकल ट्रेन के डिब्बे से बांधकर ले जाया गया। इस संबंध में छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

मंगलवार को इंस्टाग्राम (atul_tambe_vlogs) पर पोस्ट किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि लोकल ट्रेन के एक डिब्बे के बाहर पेड़ का एक लंबा तना क्षैतिज रूप से बंधा हुआ है, जो ट्रेन के दरवाजों को भी अवरुद्ध कर रहा है।

पश्चिमी रेलवे के मुंबई डिविजन के डिविजनल रेल प्रबंधक (डीआरएम) ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपनगरीय ट्रेनों में भारी सामान ले जाना प्रतिबंधित है। इस मामले में कार्रवाई शुरू है। आरोपी व्यक्तियों को रेलवे पुलिस ने पकड़ लिया है और रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

क्या है ये खास परंपरा?

बताया जाता है कि मुंबई में होली की यह अनूठी परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है। इसके पीछे ये वजह बताई जाती है। दरअसल पहले मुंबई के माहिम के मोरी रोड इलाके में कई चॉलें हुआ करती थीं। समय बदला, चॉलें टूट गईं और उनकी जगह ऊंची इमारतें खड़ी हो गईं। उन चॉलों में रहने वाले कई परिवार विरार में जाकर बस गए, लेकिन उन्होंने अपनी परंपराएं और जड़ें कभी नहीं भुलाईं।

उन्हीं यादों और उस सम्मान को बनाए रखने के लिए आज भी हर साल ‘होली’ (होलिका दहन की लकड़ी) विरार से माहिम लाई जाती है। ढोल-ताशों, उत्साह और ‘होली रे होली’ के जयघोष के बीच लोग लोकल ट्रेन से ‘होली’ को माहिम के मोरी रोड तक लेकर आते हैं।

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