बक्सर में पारंपरिक फगुआ गीतों के साथ मनी होली:बुजुर्गों और युवाओं ने चौपाल पर ढोल-मंजीरे के साथ गाए गीत, रंग लगाकर दी बधाई

बक्सर में पारंपरिक फगुआ गीतों के साथ मनी होली:बुजुर्गों और युवाओं ने चौपाल पर ढोल-मंजीरे के साथ गाए गीत, रंग लगाकर दी बधाई

बक्सर जिले के चौसा प्रखंड में होली के अवसर पर अमर नवयुवक छात्र संघ की पहल पर पारंपरिक फगुआ गीतों का आयोजन किया गया। गांव की चौपाल पर मंगलवार देर रात तक बुजुर्गों और युवाओं ने एक साथ बैठकर ढोल-मंजीरे की धुन पर धार्मिक और सांस्कृतिक होली गीत गाए। इस कार्यक्रम में गांव के बुजुर्गों ने युवाओं के साथ मिलकर फगुआ की परंपरा को आगे बढ़ाया। गाए गए गीतों में भगवान की स्तुति, पौराणिक कथाएं और सामाजिक संदेश शामिल थे। चौपाल पर उपस्थित लोगों ने बारी-बारी से गीत प्रस्तुत किए और एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। फगुआ गीतों के माध्यम से परंपरा को रखा जीवित संघ के सदस्य अखिलेश पांडेय ने बताया कि फगुआ गीतों के माध्यम से वे पूर्वजों की परंपरा को जीवित रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में सहायक होते हैं। प्रकाश चौबे ने कहा कि फगुआ गीतों में देवी-देवताओं की स्तुति, पौराणिक कथाएं और समाज को जोड़ने वाले संदेश निहित होते हैं। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी ऐसी परंपराएं हमें अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती हैं। सामूहिक रूप से सब गाते है गाना ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष होली पर सामूहिक रूप से फगुआ गाने की यह परंपरा निभाई जाती है। इसमें बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक शामिल होते हैं, जिससे आपसी प्रेम, एकता और सौहार्द की भावना मजबूत होती है। बक्सर के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक अंदाज में मनाई जा रही होली आज भी सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल है। फगुआ गीतों की गूंज और सामूहिक उत्सव ने पूरे गांव को एक सूत्र में बांध दिया। बक्सर जिले के चौसा प्रखंड में होली के अवसर पर अमर नवयुवक छात्र संघ की पहल पर पारंपरिक फगुआ गीतों का आयोजन किया गया। गांव की चौपाल पर मंगलवार देर रात तक बुजुर्गों और युवाओं ने एक साथ बैठकर ढोल-मंजीरे की धुन पर धार्मिक और सांस्कृतिक होली गीत गाए। इस कार्यक्रम में गांव के बुजुर्गों ने युवाओं के साथ मिलकर फगुआ की परंपरा को आगे बढ़ाया। गाए गए गीतों में भगवान की स्तुति, पौराणिक कथाएं और सामाजिक संदेश शामिल थे। चौपाल पर उपस्थित लोगों ने बारी-बारी से गीत प्रस्तुत किए और एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। फगुआ गीतों के माध्यम से परंपरा को रखा जीवित संघ के सदस्य अखिलेश पांडेय ने बताया कि फगुआ गीतों के माध्यम से वे पूर्वजों की परंपरा को जीवित रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में सहायक होते हैं। प्रकाश चौबे ने कहा कि फगुआ गीतों में देवी-देवताओं की स्तुति, पौराणिक कथाएं और समाज को जोड़ने वाले संदेश निहित होते हैं। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी ऐसी परंपराएं हमें अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती हैं। सामूहिक रूप से सब गाते है गाना ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष होली पर सामूहिक रूप से फगुआ गाने की यह परंपरा निभाई जाती है। इसमें बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक शामिल होते हैं, जिससे आपसी प्रेम, एकता और सौहार्द की भावना मजबूत होती है। बक्सर के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक अंदाज में मनाई जा रही होली आज भी सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल है। फगुआ गीतों की गूंज और सामूहिक उत्सव ने पूरे गांव को एक सूत्र में बांध दिया।  

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