अजमेर में होली पर सड़ा पनीर बेचने का आरोप:ग्राहक एक्सचेंज कराने पहुंचा तो कर्मचारियों ने किया इनकार, खाद्य विभाग से जांच की मांग

अजमेर में होली पर सड़ा पनीर बेचने का आरोप:ग्राहक एक्सचेंज कराने पहुंचा तो कर्मचारियों ने किया इनकार, खाद्य विभाग से जांच की मांग

होली के पर्व के बीच शहर के मदार क्षेत्र स्थित स्मार्ट प्वाइंट मार्ट से खरीदे गए पनीर को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। ग्राहक का आरोप है कि मार्ट से खरीदा गया पनीर घर पहुंचकर खोलने पर सड़ा और बदबूदार निकला। मदार निवासी मार्शल रोबिनसन ने बताया कि उन्होंने होली के लिए खाद्य सामग्री की खरीदारी के दौरान स्मार्ट प्वाइंट मार्ट से पैक्ड पनीर खरीदा था। घर जाकर जब पैकेट खोला तो उसमें से तेज दुर्गंध आने लगी और पनीर खराब हालत में मिला। इसके बाद वे तुरंत पनीर लेकर मार्ट पहुंचे और उसे बदलने या राशि लौटाने की मांग की। आरोप है कि मार्ट के कर्मचारियों ने यह कहते हुए पनीर एक्सचेंज करने से इनकार कर दिया कि पैकेट खुल चुका है, इसलिए न तो बदला जाएगा और न ही रिफंड दिया जाएगा। इसी बात को लेकर ग्राहक और कर्मचारियों के बीच बहस हो गई। मार्शल रोबिनसन ने इस संबंध में खाद्य विभाग से मार्ट के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि त्योहार के समय यदि उपभोक्ताओं को खराब खाद्य सामग्री बेची जा रही है तो यह गंभीर लापरवाही है और आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। फ़ूड डिपार्टमेंट के अधिकारी केसरी नंदन ने बताया कि मामले की जांच करवा कर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि प्रदेश के फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोलर कमिश्नरेट की ओर से 1 से 31 दिसंबर तक अभियान चलाया गया। इसका मकसद ये जांचना था कि बच्चों को परोसा जा रहा खाना सुरक्षित है या नहीं? तय मानकों के अनुसार और सही जानकारी के साथ बेचा जा रहा है या नहीं? अलग-अलग टीमों ने प्रदेशभर से 670 सैंपल लिए। इसमें बिस्किट, केक, कोल्ड ड्रिंक्स, समोसे-कचौरी जैसे स्ट्रीट फूड, आइसक्रीम, कॉटन कैंडी और मिठाइयां शामिल थीं। इन सैंपल की अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, भरतपुर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर की लैब्स में जांच कराई गई। 670 में से 75 सैंपल (11.19%) में कमियां पाई गईं। इसमें केक, पेस्ट्री, चिप्स, चॉकलेट, नूडल्स और स्ट्रीट फूड सहित 670 सैंपल की जांच की गई। रिपोर्ट में पाया गया कि केक-आइसक्रीम जैसे कई प्रोडक्ट्स में सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल तय सीमा से बहुत ज्यादा था, जो बच्चे की मेंटल और फिजिकल हेल्थ बिगाड़ सकता है।

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