बरेली में एक युवक की गलत ऑपरेशन के कारण मौत हो गई। पेट दर्द की शिकायत लेकर क्लीनिक पहुंचे अजय नामक युवक को तीन महीने तक इलाज के नाम पर परेशान किया गया। परिजनों का आरोप है कि एक झोलाछाप डॉक्टर ने उसका गलत ऑपरेशन किया, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और शहर में चल रहे अवैध क्लीनिकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारादरी थाना क्षेत्र के डोहरा गौटिया निवासी शिशुपाल के बेटे अजय को 6 दिसंबर को पेट में तेज दर्द हुआ था। परिजन उसे पीलीभीत बाईपास स्थित प्रथ्वी फार्मा क्लीनिक ले गए। परिजनों के अनुसार, वहां जयवीर नामक व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर बताया और ऑपरेशन की सलाह दी। इसके लिए उसने करीब 25 हजार रुपये लिए। परिवार का आरोप है कि पेट दर्द की शिकायत के बावजूद अजय का अंडकोष का ऑपरेशन कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद भी अजय का दर्द कम नहीं हुआ, बल्कि उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। क्लीनिक पर 25 दिनों तक पट्टी की गई और तीन बार टांके लगाए गए, लेकिन ब्लड नहीं रुका। धीरे-धीरे अजय की स्थिति इतनी खराब हो गई कि उसे चलने-फिरने में भी दिक्कत हो गई। जब अजय की हालत अत्यधिक गंभीर हो गई, तो परिजन उसे एक बड़े अस्पताल ले गए। वहां के चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि अजय का ऑपरेशन गलत तरीके से किया गया था। इस जानकारी के बाद परिवार को इलाज में हुई गंभीर लापरवाही का पता चला। कार्रवाई में देरी से परेशान परिजन 4 फरवरी को अजय को ऑटो में लिटाकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे। उस समय अजय लगातार उल्टियां कर रहा था। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर अनदेखी और मिलीभगत के आरोप लगाए, जिसके कारण झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं। इस घटना के बाद सीएमओ कार्यालय की ओर से आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। तीन महीने तक दर्द सहने के बाद अजय ने आखिर दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई की जाती और उसे उचित इलाज मिलता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।


