डीडवाना में होली के अवसर पर माली समाज की सदियों पुरानी गैर परंपरा ने एक बार फिर अपनी अनूठी सांस्कृतिक छटा बिखेरी। यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह और उल्लास के साथ निभाई जा रही है, जो शहर की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण है। धुलण्डी के दिन डोलची होली के साथ-साथ माली समाज के 12 बासों द्वारा निकाली गई गैर विशेष आकर्षण का केंद्र रही। शाम होते ही सभी बासों से सजी-धजी टोलियां ढोल-नगाड़ों की थाप पर बाजार की ओर बढ़ीं। पारंपरिक वेशभूषा और रंग-बिरंगे स्वांगों ने पूरे माहौल को होलीमय बना दिया। स्वांग रचकर किया भरपूर मनोरंजन
इस गैर में हजारों की संख्या में बच्चे, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए। कलाकारों ने विभिन्न सामाजिक और पौराणिक पात्रों के स्वांग रचकर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। शहरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर गैर का स्वागत किया, जिससे पूरा वातावरण रंग-गुलाल से सराबोर हो उठा। माली समाज की यह गैर न केवल अपनी परंपरा को जीवित रखे हुए है, बल्कि डीडवाना को पूरे प्रदेश में एक विशिष्ट पहचान भी दिला रही है। यह पूरे राजस्थान में अपनी तरह की एक अनूठी गैर है, जो केवल डीडवाना में ही देखने को मिलती है।
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड्गावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने इस परंपरा को समाज की सांस्कृतिक शक्ति बताते हुए इसे सहेजकर रखने की अपील की।


