केमिकलयुक्त रंग कर सकते हैं सेहत से खिलवाड़

केमिकलयुक्त रंग कर सकते हैं सेहत से खिलवाड़

जिम्मेदार कर रहे अनदेखी, होली पर बिकने वाले रंग-गुलाल की नहीं होती जांच

dholpur, राजाखेड़ा. होली के उल्लास के बीच बाजार में रंगों और गुलाल की दुकानें बड़ी संख्या में सज रही हैं। जिनपर बिक रहे केमिकल युक्त रंग लोगों की सेहत से गंभीर खिलवाड़ कर सकते है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर रंगों की गुणवत्ता की प्रभावी जांच की कोई व्यवस्था न होने से जिससे नकली और हानिकारक रंग खुलेआम बिक रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि सावधानी नहीं बरती गई तो खुशियों का त्योहार बीमारियों में बदल सकता है।

शहर के प्रमुख बाजारों में होली से पहले रंगों का कारोबार तेजी पर है। सस्ते और चमकीले रंग ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकांश दुकानों पर ब्रांडेड नाम से बिना मानक वाले रंग बेचे जा रहे हैं। पैकेट पर न तो निर्माण तिथि स्पष्ट है और न ही सामग्री का विवरण। चिकित्सकों के अनुसार इन रंगों में मिलाए जाने वाले तेज रसायन त्वचा, आंख और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हंै। प्रशासनिक अमला अब तक व्यापक सैंपलिंग अभियान शुरू नहीं कर पाया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को स्वयं सतर्क रहने की जरूरत है और प्राकृतिक व हर्बल रंगों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

शरीर को हो सकते हैं ये नुकसान

केमिकल युक्त रंग त्वचा पर खुजली, चकते और जलन पैदा कर सकते हैं। आंखों में जाने पर सूजन, लालिमा और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बालों पर लगाने से रूखापन और झडऩे की समस्या हो सकती है। यदि रंग के महीन कण श्वास के साथ अंदर चले जाएं तो खांसी, एलर्जी और अस्थमा के मरीजों को परेशानी बढ़ सकती है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि संवेदनशील त्वचा वाले लोग विशेष सावधानी बरतें और खेलने के बाद तुरंत साफ पानी से स्नान करें।

ब्रांडेड के नाम से नकली रंग

होली के बाजार में कई रंग प्रसिद्ध कंपनियों के नाम से बेचे जा रहे हैं, लेकिन असल में वे नकली हो सकते हैं। पैकेजिंग की नकल कर तैयार किए गए रंगों को ब्रांडेड बताकर ऊंची कीमत पर बेचा जाता है। उपभोक्ता असली-नकली की पहचान नहीं कर पाते। इन पैकेटों पर अक्सर निर्माता का पूरा पता, लाइसेंस नंबर या गुणवत्ता प्रमाणन अंकित नहीं होता। ऐसे रंगों में सस्ते और तेज रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिससे उत्पादन लागत कम हो जाती है। प्रशासन के नियमित जांच और सैंपलिंग न होने से नकली उत्पादों का कारोबार फल-फूल रहा है।

केमिकलयुक्त रंग के साइड इफेक्ट

विशेषज्ञों के अनुसार सस्ते रंगों में लेड ऑक्साइड, क्रोमियम आयोडाइड, कॉपर सल्फेट और मर्करी सल्फाइड जैसे रसायन मिलाए जाते हैं। ये तत्व इस्तेमाल किए जाते हैं जो सेहत के लिए बेहद खराब होते हैं। रंग को चमकीला और गाढ़ा बनाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। कुछ रंगों में औद्योगिक डाई और एसिडिक तत्व भी पाए जाते हैं, जो त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाते हैं। पाउडर रंगों में सिलिका और अन्य महीन कण मिलाए जाते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। ये रसायन एलर्जी, जलन और गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।जानकार बताते है कि होली पर उपयोग किए जाने वाले सस्ते रंगों में मिले रसायन त्वचा और आंखों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। कई मामलों में एलर्जिक डर्मेटाइटिस और आंखों में संक्रमण की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने सलाह दी कि लोग हर्बल या प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें, पूरे शरीर पर तेल लगाकर ही रंग खेलें और कोई परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए

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