भागलपुर में रंगों का त्योहार:पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया होली, लोकगीतों से गूंजे गांव

भागलपुर में रंगों का त्योहार:पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया होली, लोकगीतों से गूंजे गांव

भागलपुर जिले में रंगों का त्योहार होली पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। पूरे देश के साथ-साथ भागलपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी होली की धूम देखने को मिली। देर रात तक विभिन्न स्थानों पर विधि-विधान के साथ होलिका दहन का आयोजन किया गया। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाए जाने से माहौल भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना रहा। होलिका दहन से पहले कई जगहों पर भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद पूरे विधि-विधान से होलिका दहन किया गया। अग्नि प्रज्वलित होते ही लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक होली गीतों की स्वर-लहरियों के बीच जश्न का माहौल बन गया। जिले के सुल्तानगंज प्रखंड के रघुचक अन्नहार गांव में होली को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। यहां ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से होलिका दहन किया। इसके बाद ढोल, झाल और मंजीरे की थाप पर पारंपरिक लोकगीत गाए गए। युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी लोकधुनों पर थिरकते नजर आए। देर रात तक गांव में होली के गीत गूंजते रहे और लोग आपसी प्रेम व भाईचारे के रंग में रंगे दिखाई दिए। ग्रामीणों ने बताया कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक है। यह पर्व लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे के करीब लाने का संदेश देता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी गांवों में पारंपरिक अंदाज में होली मनाकर लोगों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखा। जिले में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा, ताकि होली का पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके। कुल मिलाकर, भागलपुर में होली का उल्लास चरम पर रहा और लोगों ने पूरे उत्साह के साथ इस रंगों के पर्व का आनंद लिया। भागलपुर जिले में रंगों का त्योहार होली पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। पूरे देश के साथ-साथ भागलपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी होली की धूम देखने को मिली। देर रात तक विभिन्न स्थानों पर विधि-विधान के साथ होलिका दहन का आयोजन किया गया। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाए जाने से माहौल भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना रहा। होलिका दहन से पहले कई जगहों पर भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद पूरे विधि-विधान से होलिका दहन किया गया। अग्नि प्रज्वलित होते ही लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक होली गीतों की स्वर-लहरियों के बीच जश्न का माहौल बन गया। जिले के सुल्तानगंज प्रखंड के रघुचक अन्नहार गांव में होली को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। यहां ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से होलिका दहन किया। इसके बाद ढोल, झाल और मंजीरे की थाप पर पारंपरिक लोकगीत गाए गए। युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी लोकधुनों पर थिरकते नजर आए। देर रात तक गांव में होली के गीत गूंजते रहे और लोग आपसी प्रेम व भाईचारे के रंग में रंगे दिखाई दिए। ग्रामीणों ने बताया कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक है। यह पर्व लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे के करीब लाने का संदेश देता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी गांवों में पारंपरिक अंदाज में होली मनाकर लोगों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखा। जिले में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा, ताकि होली का पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके। कुल मिलाकर, भागलपुर में होली का उल्लास चरम पर रहा और लोगों ने पूरे उत्साह के साथ इस रंगों के पर्व का आनंद लिया।  

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