संजू सैमसन के कमबैक की कहानी:बैटिंग में शरीर को शांत और स्थिर रखने पर मेहनत, 14 साल पुराने कोच के साथ हर बॉल-हर पिच की तैयारी की

ईडन गार्डन्स स्टेडियम और 58,000 से ज्यादा दर्शकों का शोर। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के करो या मरो वाले सुपर-8 मुकाबले में वेस्ट इंडीज ने भारत के सामने 196 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। दबाव के इस माहौल में जब भारतीय पारी लड़खड़ाने लगी, तब संजू सैमसन ने एक ऐसी पारी (नाबाद 97 रन) खेली, जो क्रिकेट के इतिहास में दर्ज हो गई। यह सिर्फ चौकों और छक्कों की बारिश नहीं थी, बल्कि यह पारी उस खिलाड़ी के धैर्य, शांति और मानसिक मजबूती का बेहतरीन उदाहरण थी, जिसे कुछ महीने पहले ही लगातार खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर कर दिया गया था। 50 गेंदों में खेली गई इस मैच-विनिंग पारी ने भारत को सीधे सेमीफाइनल में पहुंचा दिया है। संजू सैमसन अब बिल्कुल उसी भूमिका में वापस आ गए हैं जिसके लिए उन्हें चुना गया था- एक विकेटकीपर, एक शानदार ओपनर और एक भरोसेमंद मैच-विनर। यह पारी सिर्फ एक जीत नहीं है, बल्कि एक खिलाड़ी के कभी हार न मानने वाले जज्बे की कहानी है। ट्रिगर मूवमेंट पर फंस रहे थे, फिर पैरों की स्थिति को मजबूत किया संजू हमेशा क्रीज पर अपनी ‘स्टिलनेस’ (बल्लेबाजी के दौरान शरीर को शांत और स्थिर रखना) के लिए जाने जाते रहे हैं, लेकिन 2025 में उनके फॉर्म में गिरावट आई। शॉर्ट गेंदों पर आउट होने का सिलसिला शुरू हुआ और उनकी बल्लेबाजी में एक तरह की जल्दबाजी दिखने लगी थी। भारतीय टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने खुलासा किया कि संजू अपने ‘ट्रिगर मूवमेंट’ पर फंस रहे थे। वह गेंद के आने से काफी पहले ही पोजीशन में आ जा रहे थे, जिससे संतुलन बिगड़ रहा था। कोटक और संजू ने मिलकर उनके बेस (पैरों की स्थिति) को मजबूत किया। वेस्ट इंडीज के खिलाफ जेसन होल्डर और शमार जोसेफ की तेज गेंदों पर उनका शरीर बिल्कुल संतुलित था, जिससे वह आसानी से कट और पुल शॉट खेल पाए। माइंडसेट: फिफ्टी के बाद ऐसे गार्ड लिया, मानो दोबारा जीरो से शुरू कर रहे हों ईडन गार्डन्स पर 10वें ओवर में मोती की गेंद पर चौका लगाकर संजू ने अपनी फिफ्टी पूरी की। कमेंट्री कर रहे दिनेश कार्तिक ने एक दिलचस्प बात बताई- फिफ्टी पूरी करने के बाद संजू ने क्रीज पर ऐसे गार्ड लिया मानो वह शून्य से दोबारा शुरुआत कर रहे हों। उनका इरादा साफ था- मैच खत्म करके ही वापस लौटना है। 14वें ओवर में जब भारत को 48 गेंदों में 92 रन चाहिए थे, तब उन्होंने गियर बदला। अपनी पूरी पारी में उन्होंने 12 चौके और 4 छक्के लगाए, लेकिन जश्न तभी मनाया जब जीत सुनिश्चित हो गई। तिरुवनंतपुरम में था 4 दिन का विशेष कैंप – संजू की इस सफलता की नींव वर्ल्ड कप से काफी पहले उनके होमटाउन तिरुअनंतपुरम में रखी गई थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज से पहले सैमसन ने अनुभवी कोच जुबिन भरूचा को केरल बुलाया था। लगातार चार दिन और चार रातों तक संजू ने लाल मिट्टी, काली मिट्टी और सीमेंट की पिचों पर कड़ा अभ्यास किया। उन्होंने दिन-रात स्पिनर्स, तेज गेंदबाजों और साइड-आर्म थ्रो-डाउन विशेषज्ञों का सामना किया। – 56 वर्षीय भरूचा के अनुसार, इस कैंप का परिणाम न्यूजीलैंड सीरीज में तुरंत नहीं दिखा (जहां संजू ने 5 टी20 मैचों में केवल 46 रन बनाए), लेकिन वर्ल्ड कप की तैयारी के लिहाज से यह गहन अभ्यास उनके लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ। खुद पर शक से लेकर ‘मैच-विनर’ बनने तक का सफर, मौके को भुनाया – ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बने सैमसन ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि एक समय ऐसा था जब वह खुद पर शक करने लगे थे। उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा सोचा कि क्या मैं यह कर पाऊंगा? लेकिन मैंने अपना विश्वास बनाए रखा।’ न्यूजीलैंड सीरीज के बाद इशान किशन ने उनकी जगह ले ली थी। यहां तक कि 2024 वर्ल्ड कप में वह पूरी तरह बेंच पर बैठे रहे। – लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। नेट प्रैक्टिस में पसीना बहाते रहे और जब टीम को लेफ्ट-हैंडर हैवी टॉप ऑर्डर के बीच एक मजबूत राइट-हैंडर की जरूरत पड़ी, तो सैमसन ने मौके का पूरा फायदा उठाया।

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