Unique Holi: सरगुजा की अनोखी होली: पत्थर और तीर-धनुष से लगाते हैं निशाना, विजेता को इनाम में मिलते हैं महुआ के 2 पेड़

Unique Holi: सरगुजा की अनोखी होली: पत्थर और तीर-धनुष से लगाते हैं निशाना, विजेता को इनाम में मिलते हैं महुआ के 2 पेड़

अंबिकापुर. हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व होली सरगुजा अंचल में जनजातीय परंपराओं के साथ विशेष रूप से मनाया जाता है। बसंत ऋतु में आने के कारण इसे बसंतोत्सव भी कहा जाता है, लेकिन स्थानीय बोली में यह ‘होरी’ के नाम से प्रसिद्ध है। यहां होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामुदायिक आस्था और प्रकृति पूजन का प्रतीक है। वहीं कोड़ाकू जनजाति में होली पर अनोखी परंपरा (Unique Holi) का निर्वहन किया जाता है। 50 मीटर की दूरी से पेड़ की ठूंठ पर निशाना लगाया जाता है। इसमें विजेता निशानेबाज को महुआ के 2 पेड़ इनाम में दिए जाते हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार होलिका अहंकार और अत्याचार का प्रतीक है, जबकि भक्त प्रह्लाद आस्था और सत्य के प्रतीक माने जाते हैं। यही भाव सरगुजा की जनजातीय होली (Unique Holi) में स्पष्ट दिखाई देता है। जिला सूरजपुर के खजूरी और बैकोना गांवों में होली अलग-अलग दिन मनाई जाती है। खजूरी में पहले और बैकोना में एक दिन बाद होली होती है।

Unique holi in Surguja
Villagers of Surguja celebrated Holi (Photo- Patrika)

कंवर समाज की मान्यता है कि खजूरी पुरुष और बैकोना महिला स्वरूप का प्रतीक है। परंपरा का क्रम बदलना अशुभ माना जाता है, इसलिए पीढिय़ों से इसका पालन किया जा रहा है। वहीं सेमराकला गांव में होली एक दिन पहले मनाने की परंपरा है। ग्रामीणों का विश्वास है कि नियत दिन पर होली (Unique Holi) मनाने से विपरीत प्रभाव पड़ता है।

एक माह तक गूंजते हैं ‘होरी’ गीत

कंवर जनजाति में फाल्गुन मास के प्रथम दिन से अंतिम दिन तक होरी गीत (Unique Holi) गाए जाते हैं। झांझ, मंजीरा और मांदर की थाप पर गांव-गांव फाग गूंजते हैं। गांव के बाहर सेमर की डाली गाडक़र ‘सम्मत’ भरी जाती है। बैगा विधि-विधान से पूजा कर अग्नि प्रज्वलित करता है। सेमर की डाली को प्रह्लाद और आसपास की लकडिय़ों को होलिका का प्रतीक माना जाता है। दहन के बाद राख को ग्राम देव स्थल पर अर्पित कर ‘धूर उड़ाना’ शुरू होता है।

Unique Holi: होलिका की राख से दूर होती है बीमारी

जनजातीय मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन (Unique Holi) स्थल की राख से ज्वर, बुखार, खाज-खुजली और खसरा जैसे रोग दूर होते हैं। खेतों और फलहीन वृक्षों में राख डालने से उर्वरता बढऩे का भी विश्वास है।

Unique holi
Holika Dahan (Photo- Patrika)

निशानेबाजी की परंपरा

कोड़ाकु जनजाति में होली (Unique Holi) की जली सेमर की ठूंठ पर लगभग 50 फीट दूरी से पत्थर व तीर-धनुष से निशाना लगाया जाता है। सफल प्रतिभागी को 2 महुआ का पेड़ पुरस्कार स्वरूप दिया जाता है। इसके बाद राख से ही रंगोत्सव की शुरुआत होती है और नदी स्नान की परंपरा निभाई जाती है।

परंपरा, विश्वास व सौहार्द की मजबूत मिसाल- अजय चतुर्वेदी

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार अजय कुमार चतुर्वेदी (Unique Holi) ने अपने शोध में उल्लेख किया है कि गोंड, कंवर, उरांव, कोरवा, पंडो, खैरवार, चेरवा और अगरिया जनजातियां अपनी विशिष्ट मान्यताओं के साथ होली मनाती हैं।

Unique Holi
Ajay Chaturvedi (Photo- Patrika)

उनके अनुसार सरगुजा की होरी केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और बुराई पर अच्छाई की विजय का जीवंत प्रतीक है। सरगुजा की होरी (Unique Holi) आज भी परंपरा, विश्वास और सामुदायिक सौहार्द की मजबूत मिसाल बनी हुई है।

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