अनोखी मिसाल: यहां पेड़ों को नहीं ‘अहंकार’ को जलाते हैं लोग, चांदी की होलिका की होती है पूजा

अनोखी मिसाल: यहां पेड़ों को नहीं ‘अहंकार’ को जलाते हैं लोग, चांदी की होलिका की होती है पूजा
  • पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश करता है हरणी गांव

भीलवाड़ा में आधुनिकता की दौड़ में जहां पर्वों के नाम पर पर्यावरण का दोहन आम बात हो गई है, वहीं राजस्थान के भीलवाड़ा से मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित हरणी गांव ने संरक्षण की एक मिसाल पेश की है। यहां की होली धुआं और राख से नहीं, बल्कि आस्था और हरियाली के संकल्प से महकती है। पर्यावरण के लिए पेड़ों को ‘जीवनदान’हरणी गांव में वर्षों से होलिका दहन के लिए लकड़ियों का अंबार नहीं लगाया जाता और न ही हरे पेड़ों की टहनियां काटी जाती हैं। यहां चांदी की होलिका की ग्रामीण पूजा करते हैं।

लकड़ियों का अंबार नहीं, आस्था का दीप

जहां देशभर में होलिका दहन के लिए पेड़ों की कटाई और लकड़ियों के ढेर जलाने की होड़ मची रहती है, वहीं हरणी गांव के ग्रामीण वर्षों से पेड़ों को ‘जीवनदान’ देते आ रहे हैं। यहां होलिका दहन के लिए न तो हरे पेड़ों की टहनियां काटी जाती हैं और न ही भारी मात्रा में लकड़ी जलाई जाती है। इस गांव में लकड़ी की होली जलाने के बजाय भगवान चारभुजा नाथ मंदिर में सुरक्षित रखी चांदी की होलिका का पूजन किया जाता है। चांदी की होलिका को पूरी श्रद्धा के साथ मंदिर से ‘होलीठाण’ (नियत स्थान) तक लाया जाता है। वहां समस्त ग्रामीण एकत्र होकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। प्रतीकात्मक उत्सव के बाद, चांदी की इस प्रतिमा को पुनः सम्मानपूर्वक मंदिर के गर्भगृह में सुरक्षित रख दिया जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि प्रकृति की रक्षा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। इसी संदेश को आत्मसात करते हुए गांव ने ‘बिना आग की होली’ की अनूठी परंपरा को जीवित रखा है।

संस्कृति का कर रहे निर्वहन

हमारे पूर्वजों ने जो राह दिखाई, वह आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। हम बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए अपनी संस्कृति का निर्वहन कर रहे हैं।

सोहनलाल तेली, ग्रामीण

पेड़ों को बड़ा होने में सालों लगते हैं

गांव के हर घर का सदस्य जानता है कि एक पेड़ को बड़ा होने में सालों लगते हैं, उसे चंद मिनटों के उत्सव के लिए काटना गलत है। चांदी की होलिका की पूजा करना हमें अनुशासन सिखाता है। आस्था को पूरी पवित्रता से निभाते हैं।

पंडित गोपाल शर्मा, पुजारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *