कृषि जगत में होगी नई क्रांति की शुरुआत:जिले में लगेगी फूड प्रिजर्वेशन यूनिट, फलों का होगा संरक्षण

कृषि जगत में होगी नई क्रांति की शुरुआत:जिले में लगेगी फूड प्रिजर्वेशन यूनिट, फलों का होगा संरक्षण

बिहार के कृषि जगत में एक नई क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। भागलपुर जिले के किसानों को उद्यानिक उत्पाद सड़ने और खराब होने का डर नहीं सताएगा। राज्य सरकार की नई पहल के तहत जिले में एक अत्याधुनिक खाद्य परिरक्षण संयंत्र (फूड प्रिजर्वेशन) स्थापित किया जाएगा। यहां एटॉमिक रेडिएशन (परमाणु विकिरण) तकनीक के जरिए फल, सब्जियों और अनाज का संरक्षण किया जाएगा। इस आधुनिक विधि में फल और सब्जियों को नियंत्रित मात्रा में गामा या एटॉमिक किरणों से गुजारा जाता है। इससे खाद्य पदार्थों की पौष्टिकता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। ये किरणें उत्पादों के भीतर मौजूद कीड़ों, बैक्टीरिया और हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती हैं। इससे फल और सब्जियां लंबे समय तक ताजी बनी रहती हैं। जर्दालु आम, लीची समेत अन्य उद्यानिक फसलों की खेती करने वाले को फायदा भागलपुर के जर्दालु आम और कतरनी चावल विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन उचित भंडारण और संरक्षण की कमी के कारण किसानों को अक्सर फसलों का उचित दाम नहीं मिल पाता है। इस नई तकनीक से किसान जर्दालु आम, लीची, मशरूम समेत अन्य उद्यानिक फसलों को आसानी से भंडारण कर लंबे समय तक सुरक्षित रख सकेंगे। आसानी से विदेशों में एक्सपोर्ट भी कर सकेंगे। कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि इस संयंत्र के शुरू होने से भागलपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के किसानों को भी फायदा होगा। अब तक लगभग 30 से 35% फल-सब्जियां बाजार पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती है। एटॉमिक तकनीक से किसानों की आय में भारी बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी। “जिले में खाद्य परिरक्षण संयंत्र की स्थापना को लेकर जमीन तलाशी जा रही है। यह संयंत्र न केवल कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधरेगा, बल्कि भागलपुर को एक बड़े एग्रो-प्रोसेसिंग हब के रूप में भी विकसित करेगा।”
– मधुप्रिया, जिला उद्यान पदाधिकारी, भागलपुर बिहार के कृषि जगत में एक नई क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। भागलपुर जिले के किसानों को उद्यानिक उत्पाद सड़ने और खराब होने का डर नहीं सताएगा। राज्य सरकार की नई पहल के तहत जिले में एक अत्याधुनिक खाद्य परिरक्षण संयंत्र (फूड प्रिजर्वेशन) स्थापित किया जाएगा। यहां एटॉमिक रेडिएशन (परमाणु विकिरण) तकनीक के जरिए फल, सब्जियों और अनाज का संरक्षण किया जाएगा। इस आधुनिक विधि में फल और सब्जियों को नियंत्रित मात्रा में गामा या एटॉमिक किरणों से गुजारा जाता है। इससे खाद्य पदार्थों की पौष्टिकता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। ये किरणें उत्पादों के भीतर मौजूद कीड़ों, बैक्टीरिया और हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती हैं। इससे फल और सब्जियां लंबे समय तक ताजी बनी रहती हैं। जर्दालु आम, लीची समेत अन्य उद्यानिक फसलों की खेती करने वाले को फायदा भागलपुर के जर्दालु आम और कतरनी चावल विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन उचित भंडारण और संरक्षण की कमी के कारण किसानों को अक्सर फसलों का उचित दाम नहीं मिल पाता है। इस नई तकनीक से किसान जर्दालु आम, लीची, मशरूम समेत अन्य उद्यानिक फसलों को आसानी से भंडारण कर लंबे समय तक सुरक्षित रख सकेंगे। आसानी से विदेशों में एक्सपोर्ट भी कर सकेंगे। कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि इस संयंत्र के शुरू होने से भागलपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के किसानों को भी फायदा होगा। अब तक लगभग 30 से 35% फल-सब्जियां बाजार पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती है। एटॉमिक तकनीक से किसानों की आय में भारी बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी। “जिले में खाद्य परिरक्षण संयंत्र की स्थापना को लेकर जमीन तलाशी जा रही है। यह संयंत्र न केवल कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधरेगा, बल्कि भागलपुर को एक बड़े एग्रो-प्रोसेसिंग हब के रूप में भी विकसित करेगा।”
– मधुप्रिया, जिला उद्यान पदाधिकारी, भागलपुर  

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