संभल में अयातुल्ला अली ख़ामेनई के निधन की खबर के बाद शहर में शोक का माहौल बन गया। मोहल्ला नूरियो सराय स्थित इमाम बारगाह फरमान हुसैन में रविवार देर रात एक मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने पहुंचकर अपने धर्मगुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की। रमजान के पवित्र महीने में भी शोक का असर दिखाई दिया। रोजा इफ्तार सामान्य दिनों की तरह नहीं किया गया। कई घरों में इफ्तारी नहीं बनाई गई और लोगों ने सादगी के साथ समय बिताया। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी अपने धर्मगुरु की याद में एकत्रित हुए। मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन से हुई। इसके बाद शमाईम रज़ा ने मर्सिया पेश किया। शायर पैकर संभली ने अपने कलाम में कहा, “अली वाले सर कटा सकते हैं, लेकिन जालिम के सामने झुक नहीं सकते।” उन्होंने कर्बला के मैदान का जिक्र करते हुए कहा कि 1400 साल पहले हक और बातिल की जंग में इमाम हुसैन को शहीद किया गया था, जिन्हें आज भी पूरी दुनिया श्रद्धा से याद करती है। मजलिस को खिताब करते हुए सुहैल अब्बास ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने सब्र और हौसले का पैगाम देते हुए कहा, “शहीदों की कुर्बानियां इंसानियत को जुल्म के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देती हैं।” मजलिस के समापन पर मातम और नौहाख्वानी की गई। उपस्थित लोगों ने अयातुल्ला अली ख़ामेनई के लिए फातेहा पढ़ी और दुआ-ए-मगफिरत की। यह आयोजन शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ


