राजिम हिंसा मामले में न्यायिक जांच की जाए-AAP:दुत्कैया गांव के 13 परिवारों का घर जलाने का दावा

राजिम हिंसा मामले में न्यायिक जांच की जाए-AAP:दुत्कैया गांव के 13 परिवारों का घर जलाने का दावा

राजिम के दुत्कैया गांव में हुई हिंसा को लेकर आम आदमी पार्टी ने न्यायिक जांच और मुआवजे की मांग की है, दुत्कैया गांव पहुंचकर टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और जांच के बाद कई गंभीर तथ्य सामने रखे हैं। शनिवार को पार्टी ने रायपुर स्थित राज्य कार्यालय में प्रेसवार्ता कर न्यायिक जांच, पीड़ित परिवारों को मुआवजा और सुरक्षा देने की मांग की। प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला ने कहा कि 1 फरवरी 2026 को हुई घटना के 28 दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों को न तो सरकारी मुआवजा मिला और न ही रहने-खाने की समुचित व्यवस्था की गई। क्या है मामला आप नेताओं के मुताबिक, 1 फरवरी को दुत्कैया गांव में 13 मुस्लिम परिवारों के घरों में आगजनी और तोड़फोड़ की गई। आरोप है कि बाहरी लोगों के साथ मिलकर घरों में घुसकर मारपीट की गई और महिलाओं से दुर्व्यवहार हुआ। पार्टी का दावा है कि कुछ लोग पेट्रोल बम, लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर पहुंचे थे। हिंसा में कई लोग घायल हुए, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए। आप की जांच टीम ने 24 और 25 फरवरी को पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी आपबीती सुनी।

प्रशासन पर लापरवाही का आरोप पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि घटना के बाद जिला प्रशासन ने पर्याप्त मदद नहीं पहुंचाई। उनका कहना है कि राहत और पुनर्वास की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन अब तक अधिकांश मदद सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों के जरिए दी गई। प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय पर हमलों को रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। न्यायिक जांच की मांग प्रेसवार्ता में शामिल पीड़ितों ने मारपीट, आगजनी और महिलाओं के साथ अभद्रता के आरोप लगाए। पार्टी ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रियंका शुक्ला ने कहा कि मामले की जांच हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग से कराई जाए। सभी पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और जले हुए घरों का पुनर्निर्माण कराया जाए।

आप की प्रमुख मांगें प्रत्येक पीड़ित परिवार को मुआवजा और पुनर्वास घटना की न्यायिक जांच घायलों के इलाज का खर्च सरकार उठाए सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की सार्वजनिक जानकारी पीड़ित परिवारों को सुरक्षा आप ने कहा कि यह केवल एक समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा मामला है। अब नजर इस पर है कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।

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