इस साल होलिका दहन की तिथि और होली खेलने के दिन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कहीं 2 मार्च तो कहीं 3 मार्च को होलिका दहन की बात कही जा रही है। वहीं, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। इन संशयों को दूर करते हुए ज्योतिष आचार्य पंडित सुरेश कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया है कि शास्त्र सम्मत रूप से 2 मार्च की मध्यरात्रि का समय होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ रहेगा। पंडित सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि 2 मार्च की संध्या बेला में भद्रा काल का प्रभाव रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है, इसलिए सूर्यास्त के तुरंत बाद दहन करना उचित नहीं होगा। भद्रा समाप्त होने के पश्चात रात्रि 12:50 बजे से 2:02 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा। इस मुहूर्त में विधि-विधान से पूजन और दहन करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। इसका प्रभाव भारत में भी देखा जाएगा। ग्रहण के कारण 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी। परंपरा और ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दिन या उसके तुरंत बाद रंग खेलने से परहेज करना चाहिए। इसलिए, रंगों का उत्सव एक दिन के अंतराल के बाद 4 मार्च को मनाया जाएगा। पंडित सुरेश कुमार शर्मा के अनुसार, होलिका दहन के समय सात बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। सात अंक को आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्णता और मंगल का प्रतीक माना गया है। श्रद्धा भाव से परिक्रमा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। होलिका दहन की राख को लेकर भी लोगों में जिज्ञासा बनी रहती है। पंडित सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि कई धार्मिक मान्यताओं में होलिका की राख को घर लाना शुभ माना गया है।


