कटनी. नगर निगम द्वारा तैयार किए गए बकाया सेवा कर के आंकड़े शहर में सरकारी विभागों की लंबित देनदारियों की गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं। वर्ष 2010-11 से 2025-26 तक की अवधि का ब्यौरा सामने आया है, जिसमें शहर की विभिन्न सरकारी संपत्तियों पर कुल 3,81,48,560 रुपए (तीन करोड़ इक्यासी लाख अड़तालीस हजार पांच सौ साठ रुपए) का बकाया दर्ज है। यह बकाया केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, विभागीय भवनों, महाविद्यालय, स्कूल, चिकित्सालय, छात्रावास, पुलिस क्वार्टर, कृषि एवं पशुपालन विभाग, वन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और अन्य संस्थाओं पर लंबित है।
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से बकाया वसूली न होने के कारण निगम की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है। इसका असर सडक़, जल निकासी, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य स्थानीय विकास कार्यों पर पड़ रहा है। अधिकारी कहते हैं कि समय पर कर वसूली से निगम के पास इन विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।
बकाया सेवा कर की अहमियत
बकाया सेवा कर नगर निगम द्वारा शहर की संपत्तियों से वसूल किया जाने वाला वार्षिक कर है। यह कर सडक़ निर्माण, जल निकासी, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य स्थानीय विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सरकारी विभाग और संस्थान भी नगर निगम के अंतर्गत अपनी परिसंपत्तियों पर यह कर समय पर जमा करने के लिए बाध्य हैं। जब यह कर जमा नहीं होता है, तो इसे बकाया सेवा कर कहा जाता है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय अनुशासन और नियमित कर भुगतान से निगम को नई योजनाओं के लिए संसाधन आसानी से मिल सकते हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आने वाले महीनों में अधिकांश बकाया राशि वसूल करने की योजना बनाई जा रही है।
वसूली के प्रयास और चुनौतियां
नगर निगम ने बकाया चुकाने के लिए विभागों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन कई विभाग बजट की कमी का हवाला दे रहे हैं। वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में निगम सक्रिय हो रहा है और जगह-जगह बकाया वसूली के शिविर लगाए जा रहे हैं। नल कनेक्शन काटे जा रहे हैं और दुकानों में तालाबंदी की जा रही है, लेकिन बकाया वसूली में अभी तक तेजी नहीं दिखाई दे रही है। नगर निगम का कहना है कि यदि यह राशि समय पर प्राप्त हो जाती, तो शहर में सडक़, सफाई, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और आधारभूत विकास कार्यों पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते थे। अब निगम प्रशासन संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर चरणबद्ध वसूली की तैयारी कर रहा है।
यह है अधिरोपित सेवा कर के बड़े बकायादार
- शासकीय तिलक महाविद्यालय 37,62,719
- जल संसाधन कार्यालय 6,54,908
- पोस्टल पीएंडटी कॉलोनी 2,61,543
- आरएमएस पीएंडटी कॉलोनी 2,61,505
- शासकीय औद्योगिक संस्थान 30,58,260
- थाना एनकेजे 66,684
- जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान 28,74,016
- ईएफए स्कूल 10,10,303
- पश्चिम मध्य रेल, क्षेत्रीय प्रबंधक 4,25,991
- जनपद कटनी कार्यालय 3,77,279
- पीडब्ल्यूडी क्वार्टर, गणेश चौक 1,71,945
- पीडब्ल्यूडी क्वार्टर, मधई मंदिर मार्ग 1,47,195
- सरकारी रेस्ट हाउस 1,56,577
- जिला चिकित्सालय 53,32,035
- पीडब्ल्यूडी क्वार्टर, सिविल लाइन 1,07,508
-पीडब्ल्यूडी क्वार्टर, जोहर गली 20,674
-पीडब्ल्यूडी क्वार्टर, सेंट्रल स्कूल के पास 71,210
-कोर्ट बिल्डिंग, कचहरी चौक 2,12,021
-पुलिस गवर्नमेंट क्वार्टर 3,02,806 - विक्रय कर विभाग हाऊसिंग बोर्ड 78,030
- बीएसएनएल द्वारिका सिटी 6,96,323
उच्चतर माध्यमिक शाला हेमुकालाणी वार्ड 14,50,358
पीडब्ल्यूडी क्वार्टर, ए.डी.एम. लाइन 1,13,447
पीडब्ल्यूडी क्वार्टर, एडीएम लाइन 1,13,447
सहायक यंत्री, लोक यांत्रिकी विभाग 2,56,562
वन विभाग कार्यालय, झिंझरी 7,25,210
पुलिस अधीक्षक निवास 3,93,032
कलेक्टर कार्यालय (जिला दण्डाधिकारी) 14,79,653
रजिस्ट्रार विभाग 1,20,162
संभागीय कार्यालय, लोक निर्माण विभाग 2,97,165
कृषि विभाग कार्यालय 1,24,888
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग कार्यालय 3,60,178
सचिव, कृषि उपज मंडी 86,21,263
फॉरेस्ट रेंज कार्यालय 4,67,217
पशु चिकित्सालय 10,38,818
प्राथमिक कन्या शाला 1,05,936
मध्यप्रदेश शासन विभाग 3,40,432
बकायादार विभागों की संख्या 56
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार कुल 56 विभाग और संस्थाएं बकाया राशि की देनदार हैं। इनमें पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, कलेक्ट्रेट, शिक्षा विभाग, कृषि एवं पशुपालन विभाग, वन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और कई महाविद्यालय एवं स्कूल शामिल हैं। निगम का मानना है कि समन्वित प्रयास और नियमित फॉलोअप से आने वाले समय में बकाया राशि में बड़ी कटौती संभव है। यह बकाया कर वर्ष 2010-11 से 2025-26 तक का है। नगर निगम ने यह सूची लगभग चार वर्ष पूर्व तैयार की थी, लेकिन अब तक सभी विभागों से राशि वसूल नहीं हो सकी है। निगम अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लंबित कर राजस्व की भरपाई की जा सके और शहर में विकास कार्यों में बाधा न आए।
इनका कहना
नगरनिगम के करों की वसूली को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। लगातार समीक्षा की जा रही है। नागरिकों की सुविधा के लिए शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है। शासकीय विभागों में बकाया करों की वसूली के लिए भी पत्राचार किया गया है। समयसीमा में वसूली के प्रयास किए जा रहे हें।


