MP News: आधुनिक दौर में जहां शादियां आलीशान गाड़ियों और भव्य सजावट के बीच हो रही हैं, वहीं मनावर क्षेत्र में एक विवाह ने सादगी और परंपरा की मिसाल पेश की। ग्राम कुराड़ाखाल निवासी विशाल पिता मोतीलाल परिहार अपनी बारात बैलगाड़ी में सवार होकर दुल्हन जागृति के घर गुलाटी पहुंचे। सजी-धजी बैलगाड़ी, रंग-बिरंगे कपड़ों से सजे बैल, फूलों की मालाएं और गुब्बारों की सजावट, यह नजारा देखते ही बन रहा था।
पारंपरिक वेशभूषा में सजे दूल्हे विशाल जब बैलगाड़ी पर बैठे, तो ग्रामीणों की उत्सुक निगाहें उसी पर टिक गईं। कुराड़ाखाल से गुलाटी तक करीब एक किलोमीटर की दूरी बारात ने पारंपरिक अंदाज में तय की। बैलगाड़ी के पीछे-पीछे बाइक पर सवार बाराती और मेहमान चलते रहे। रास्ते भर ढोल-ताशों और हंसी-खुशी के माहौल में गांव जैसे उत्सव में बदल गया। अब ये बारात लोगों के बीच खूब चर्चा का विषय बन रही है।
पेशे से वकील, सोच में परंपरा का सम्मान
विशाल पेशे से वकील हैं और मनावर कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। आधुनिक साधनों के बीच उन्होंने अपनी शादी में पारंपरिक बैलगाड़ी से बारात ले जाने का निर्णय लिया। उनके इस फैसले की ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने सराहना की। लोगों का कहना है कि यह विवाह दिखावे से दूर, संस्कृति से जुड़ा और प्रेरणादायक रहा।
गांव की संस्कृति और विरासत की झलक
ग्रामीणों के अनुसार बैलगाड़ी से निकली बारात केवल एक रस्म नहीं, बल्कि गांव की संस्कृति और विरासत का जीवंत प्रतीक है। यह परंपरा आज भी लोगों के दिलों में बसी है और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। पूरे हर्षोल्लास और सामूहिक सहभागिता के बीच संपन्न यह विवाह समारोह गांव के लिए यादगार बन गया जहां परंपरा, सादगी और खुशी का सुंदर संगम देखने को मिला।


