एमपी में लेखापाल ने रिश्वत में मांगा 54 हजार का मोबाइल, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

MP News: मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के कटनी जिले का है जहां जिला पंचायत के लेखापाल को लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा है। लेखापाल रिश्वत में 54 हजार रुपये का मोबाइल मांग रहा था और इस मोबाइल के पैसे किस्तों में देने पर सौदा तय हुआ था।

रिश्वत में मांगा 54 हजार रुपये का मोबाइल

कटनी जिला पंचायत कार्यालय की स्थापना शाखा में पदस्थ लेखापाल सतेन्द्र सोनी को लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने गुरुवार को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा है। रिश्वतखोर लेखापाल सतेन्द्र सोनी कटनी जिले की बडवारा तहसील के निगहरा गांव के रहने वाले आशीष दुबे से उसकी बहाली के एवज में रिश्वत के तौर पर 54 हजार रुपये के मोबाइल की मांग कर रहे थे। आशीष दुबे ने एक साथ 54 हजार रुपये न दे पाने की बात कही तो किस्तों में पैसा देना तय हुआ। पहली किस्त के रूप में 5000 रुपये तथा फरवरी का वेतन मिलने पर 10000 रुपये एवं शेष राशि बहाल होने पर वेतन मिलने के उपरांत किस्त के रूप में देना तय हुआ।

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लोकायुक्त ने रंगेहाथों पकड़ा

लेखापाल सतेन्द्र सोनी के द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत फरियादी आशीष दुबे ने लोकायुक्त जबलपुर कार्यालय में की। लोकायुक्त टीम ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर गुरुवार 26 फरवरी को रिश्वत की पहली किस्त के 5 हजार रुपये देने के लिए फरियादी को रिश्तखोर लेखापाल के पास भेजा। जिला पंचायत कार्यालय में जैसे ही लेखापाल ने फरियादी से रिश्वत के रुपये लिए तो सादे कपड़ों में मौजूद लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथों धरदबोचा। जब लोकायुक्त टीम ने लेखापाल सत्येन्द्र सोनी के हाथ धुलवाये तो कैमिकल लगे नोट पकड़ने के कारण उनके हाथ गुलाबी हो गए।

फरियादी का भी है रिश्वत रिकॉर्ड

एक दिलचस्प बात ये है कि जिस फरियादी आशीष दुबे की शिकायत पर लोकायुक्त ने लेखापाल को रिश्वत लेते पकड़ा है वो भी रिश्वत के मामले में ट्रैप हो चुका है। साल 2023 आशीष दुबे को लोकायुक्त ने रिश्वत के एक मामले में सह आरोपी के रूप में पकड़ा था और बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया था। लेकिन बाद में उन्हें हाईकोर्ट से राहत मिली और बहाली के आदेश जारी हुए।

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