‘परफेक्ट सेल्फी’ की होड़ में दम तोड़ रहे बाघ

‘परफेक्ट सेल्फी’ की होड़ में दम तोड़ रहे बाघ

उत्तरी थाईलैंड के चियांग माई में स्थित टाइगर किंगडम की दो सुविधाओं में रह रहे 240 से ज़्यादा बाघों में से लगभग एक-तिहाई की मौत हो गई है। फरवरी के महज दस दिनों में 72 बाघ दम तोड़ चुके हैं। सवाल उठ रहा है कि यह केवल एक वायरस का प्रकोप था या उस पर्यटन मॉडल की कीमत, जहाँ ‘परफेक्ट सेल्फी’ या फोटो के लिए पर्यटकों को बाघों को छूने और गले लगाने का अनुभव बेचा जाता है। शुरुआती जांच में बताया गया है कि मौत की वजह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और माइकोप्लाज़्मा बैक्टीरिया का घातक मिश्रण था। यह श्वसन, पाचन और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।

तेज़ी से फैलता है संक्रमण

एक्सपर्ट्स के अनुसार यह संक्रमण उस जगह तेज़ी से फैलता है, जहाँ जानवरों को छोटे बाड़ों में ठूंसकर रखा जाता है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि संक्रमण का स्रोत बाघों को खिलाया जाने वाला कच्चा चिकन भी हो सकता है। साल 2004 में भी चोनबुरी के एक टाइगर चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू के कारण 150 बाघों की मौत हुई थी, जिसका कारण दूषित चिकन बताया गया था। थाईलैंड के मामले की विस्तृत जांच जारी है।

बाघ पर्यटन का ‘काला सच’

थाईलैंड के निजी पार्कों में इस समय 800 से ज़्यादा बाघ कैद में हैं। शावकों को जन्म के 2-3 हफ्तों के भीतर माँ से अलग कर दिया जाता है, ताकि वो इंसानों के बीच रहने के अभ्यस्त हो जाएं। पशु अधिकार समूहों का दावा है कि पर्यटक जब तक इन आकर्षणों की ओर खिंचे चले जाएंगे, तब तक बाघों का यह शोषण जारी रहेगा। फोटो सेशन के दौरान बाघों को जबरन शांत रखा जाता है और उन्हें कंक्रीट के छोटे पिंजरों में जंजीरों से बांध कर रखा जाता हैँ।

दो सप्ताह के लिए बंद हुआ पार्क

घटना के बाद टाइगर किंगडम को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। अब तक किसी भी स्टाफ या पर्यटक के संक्रमित होने की खबर नहीं है। एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसे निजी पार्कों में अक्सर ‘इनब्रीडिंग’ यानी एक ही वंश में प्रजनन कराया जाता है। इससे जेनेटिक विविधता घटती है और रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *