दीनबंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी मुरथल में मंगलवार को महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत–2047 विषय को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं, विशेषकर छात्राओं को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करना और विकसित भारत के संकल्प में महिलाओं की निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने की। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. आशुतोष मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और प्राध्यापक भी उपस्थित रहे। छात्राओं की समस्याओं के समाधान का भरोसा
मुख्यातिथि रेनू भाटिया ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि किसी भी छात्रा या महिला को किसी प्रकार की समस्या है, तो वे बिना झिझक उनसे मिल सकती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
वैदिक काल से नारी सम्मान की परंपरा
रेनू भाटिया ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास माना जाता है। वैदिक काल में महिलाओं को उच्च सम्मान प्राप्त था और उसी समय भारत आर्थिक रूप से समृद्ध राष्ट्र था।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा में और अधिक सशक्त बनाया जाए। विकसित भारत 2047 में महिलाओं की निर्णायक भूमिका
रेनू भाटिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। यह लक्ष्य तभी साकार होगा जब देश की आधी आबादी, अर्थात महिलाएं, समान भागीदारी निभाएंगी।
उन्होंने कहा कि लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया। शहीद भगत सिंह ने मात्र 23 वर्ष की आयु में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। आज हम सबका दायित्व है कि उनके सपनों के भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में साकार करें।
आत्मनिर्भर और सबल बनने का आह्वान
उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे आत्मनिर्भर बनें और अपने भीतर की क्षमता को पहचानें। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे छात्राओं की समस्याओं का समाधान एक मां की तरह करेंगी और हर संभव सहयोग देंगी। महिला सशक्तिकरण विकास की आधारशिला: प्रो. प्रकाश सिंह
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब महिला सशक्तिकरण को विकास की आधारशिला बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह समय केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी है कि क्या हमने ऐसा समावेशी और सुरक्षित समाज बनाया है जहां महिलाएं सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
सुरक्षा, सम्मान और नेतृत्व में भागीदारी
प्रो. सिंह ने कहा कि महिला सुरक्षा और सम्मान केवल कानूनों से सुनिश्चित नहीं हो सकता, बल्कि समाज की मानसिकता में बदलाव आवश्यक है।
उन्होंने पंचायतों, संसद और विभिन्न संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि नेतृत्व के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका निरंतर सशक्त हो रही है।
यूनिवर्सिटी की अहम भूमिका
अंत में उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि समानता, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन के केंद्र बनने चाहिए।
कार्यक्रम में एनएसएस समन्वयक प्रो. अनिल सिंधु, प्रो. संजू सैनी सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और प्राध्यापक उपस्थित रहे।


