US Tariffs: नियम बदले पर नीयत नहीं, Donald Trump ने निकाला टैरिफ वसूल करने का नया रास्ता,आपकी जेब पर क्या होगा असर

US Tariffs: नियम बदले पर नीयत नहीं, Donald Trump ने निकाला टैरिफ वसूल करने का नया रास्ता,आपकी जेब पर क्या होगा असर

Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार जगत को एक नई चेतावनी दे कर तहलका मचा दिया है।उनका टैरिफ क्रिकेट की गूगली और बाउंसर गेंद की तरह हो गया है। बिजनेसमैन और जनता समझ पाएं, उससे पहले ही न समझ में आने वाली गेंद आ जाती है। ध्यान रहे कि हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ट्रंप की ओर से लगाए गए कई आयात शुल्कों (Trump Tariffs) को गैर-कानूनी बताते हुए खारिज कर दिया था, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि उनकी नीतियां बदलने वाली नहीं हैं, बस उन्हें लागू करने का कानूनी तरीका बदल दिया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर (Jamieson Greer )ने कहा कि फैसले के बावजूद सरकार की टैरिफ नीति जस की तस रहेगी।

आखिर क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम(IEEPA ) नामक कानून का गलत इस्तेमाल कर के दुनिया भर के उत्पादों पर भारी टैक्स लगा दिया था। अदालत के इस फैसले के बाद, ट्रंप ने हार नहीं मानी। उन्होंने तुरंत एक दूसरे कानून का सहारा लिया और सभी देशों से आने वाले सामान पर 10% का या टैरिफ लगा दिया। इसके ठीक एक दिन बाद, उन्होंने इस दर को बढ़ाकर 15% कर दिया, जो मंगलवार से लागू हो जाएगा।

व्यापारियों और उपभोक्ताओं में हड़कंप

इस अचानक हुए बदलाव से दुनिया भर के व्यापारी परेशान हैं। ट्रंप का तर्क है कि टैरिफ से अमेरिका में नौकरियां बढ़ेंगी और घरेलू निर्माण को ताकत मिलेगी, लेकिन सच कुछ और ही नजर आ रहा है। न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन, मैक्सिको या यूरोप पर लगाए गए इन टैरिफ का 90% आर्थिक बोझ अमेरिकी कंपनियों और वहां के आम उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ रहा है, जिससे महंगाई बढ़ रही है।

बार-बार नियम बदलने से भारी अनिश्चितता पैदा हो गई

ब्रिटेन की एक कंपनी, जो अपना 60% माल अमेरिका भेजती है, उसके मालिक ने बताया कि बार-बार नियम बदलने से भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है। उनके उत्पादों पर कभी 0%, कभी 145%, तो कभी 15% टैक्स लग रहा है, जिससे व्यापार करना एक बुरा सपना बन गया है।

क्या 130 अरब डॉलर वापस मिलेंगे ?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से पुराने टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद, क्या व्यापारियों को चुकाया गया 130 अरब डॉलर वापस मिलेगा? कोर्ट ने इस पर कोई आदेश नहीं दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का मानना है कि यह मामला अब निचली अदालतों में जाएगा, और सरकार की योजना किसी भी तरह का पैसा वापस करने की नहीं है। प्रशासन नए कानूनी तरीकों की तलाश कर रहा है ताकि टैक्स वसूली का यह सिलसिला बिना किसी रुकावट के चलता रहे।

ब्रिटेन और यूरोपीय संघ) में इस कदम को लेकर भारी निराशा

अमेरिकी व्यापार जगत और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों मसलन ब्रिटेन और यूरोपीय संघ) में इस कदम को लेकर भारी निराशा है। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि रातों-रात नीतियां और टैक्स की दरें बदलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिका की विश्वसनीयता कम हो रही है और ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

अमेरिकी कांग्रेस (संसद) और निचली अदालतों पर टिकीं हैं नजरें

अब सबकी नजरें अमेरिकी कांग्रेस (संसद) और निचली अदालतों पर टिकी हैं। ट्रंप जिस नए कानून का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह केवल 150 दिनों तक ही लागू रह सकता है। इसके बाद इसे जारी रखने के लिए उन्हें कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। साथ ही, 130 अरब डॉलर की रिफंड याचिका पर निचली अदालतों के फैसले का भी इंतज़ार रहेगा।

य​ह’राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा: ट्रंप

इस पूरी बहस में आम अमेरिकी नागरिक पिस रहा है। ट्रंप इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा बता रहे हैं, लेकिन अर्थशास्त्रियों की चेतावनी है कि जब विदेशी सामान पर टैक्स बढ़ता है, तो कंपनियां वह लागत सीधे ग्राहकों से वसूलती हैं। यानि ट्रंप के इस कदम से अमेरिका में रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम तेज़ी से बढ़ सकते हैं।

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