सीनियर IAS के समझाने पर भी घूस मांगते रहे डॉक्टर:पीड़ित बोला- कैफे बुलाकर कहा कि 2 लाख महीने के दो, बेईमानी करते रहो

सीनियर IAS के समझाने पर भी घूस मांगते रहे डॉक्टर:पीड़ित बोला- कैफे बुलाकर कहा कि 2 लाख महीने के दो, बेईमानी करते रहो

जयपुर में स्ट्रीट डॉग का टीकाकरण-नसबंदी करने वाली फर्म से 15 लाख की रिश्वत मांगने वाले दोनों सरकारी वेटरनरी डॉक्टर जेल में हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में सामने आया कि दोनों डॉक्टरों को एक सीनियर आईएएस अधिकारी ने पहले समझाया था। कुछ दिन शांत रहने के बाद फिर से फर्म के मालिक और शिकायतकर्ता डॉक्टर को परेशान करना शुरू कर दिया था। घूस के लिए दोनों डॉक्टर इतने आतुर थे कि शिकायतकर्ता (पीड़ित) को एक रेस्टोरेंट बुलाया। ऑफर दिया कि अभी 2 लाख रुपए महीने के दो, भले जितनी मर्जी बेईमानी करो। अगले साल से रेट बढ़ जाएगा। पीड़ित ने भास्कर को बताया- मना करने पर अगले ही दिन दोनों डॉक्टरों ने फर्म के खिलाफ 3-3 नोटिस जारी कर दिए। इसके बाद सीनियर IAS के सुझाव पर ACB की शरण ली। इतना ही नहीं, पकड़े जाने के बाद आरोपी डॉक्टरों ने ACB कोर्ट में भी पीड़ित को देख लेने की धमकी दी। सीनियर आईएएस के समझाने पर भी नहीं माने पीड़ित ने बताया कि वे खुद वेटरनरी डॉक्टर हैं। स्ट्रीट डॉग की नसबंदी और वैक्सीनेशन का 29 साल का अनुभव है। जयपुर नगर निगम से उन्हें स्ट्रीट डॉग के वैक्सीनेशन और नसबंदी का टेंडर मिला था। नसबंदी के दौरान कितने UTERUS एवं TESTICLES निकाले गए, इसकी गणना का जिम्मा निगम के डॉक्टर गणना के पास था। काम पूरा करने के बाद दोनों अधिकारियों ने जरूरी गणना और फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग शुरू कर दी। 75 लाख का बिल पास करने के बदले 15 लाख की डिमांड की। पीड़ित ने बताया- वेलफेयर के कामों के चलते उनका संपर्क एक सीनियर आईएएस अधिकारी से था। मैंने रिश्वत मांगने के बारे में उनसे जिक्र किया। इस पर सीनियर आईएएस ने दोनों डॉक्टरों को बुलाकर समझाया। दोनों डॉक्टर कुछ दिनों तक शांत रहे। कुछ दिन बाद फिर से रिश्वत के लिए परेशान करने लगे। मैंने फिर से उन्हीं IAS से संपर्क कर कहा कि दुबारा रिश्वत मांगी जा रही है तो उन्होंने ACB में शिकायत की सलाह दी। इसके बाद मैंने एसीबी मुख्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज करवाई। सत्यापन के बाद ACB ने ट्रैप की रणनीति बनाई और दोनों को गिरफ्तार किया। कैफे बुलाकर कहा- अगले साल 3.5 लाख रुपए देने होंगे
पीड़ित ने बताया- आरोपी डॉ. राकेश कलोरिया और डॉ. योगेश शर्मा ने 30 दिसंबर 2025 को चित्रकूट इलाके में बागान दा टी विलेज नाम के एक रेस्त्रां में बुलाया। मुझसे कहा- आप इतना कमाते हैं, हमें 2 लाख रुपए हर महीने दे दिया करो और बिल पास करवा लिया करो। यह प्राइस केवल इसी साल के लिए लागू है। अगले साल से हर महीने का रेट 3.3 लाख रुपए हो जाएगा। इस पर मैंने कहा- लेकिन मैं तो ईमानदारी से काम करता हूं। पीड़ित के अनुसार, आरोपी डॉक्टरों ने कहा- किसने कहा है ईमानदारी से काम करने को…हमारा कमीशन देने के बाद जो काम करना है, वह करो, ईमानदारी से करो या बेईमानी से करो, हमें कोई परेशानी नहीं। हम कभी आपके काम में कोई दखल नहीं देंगे। पीड़ित के अनुसार, मैंने मौके पर ही इनकार कर दिया। डॉ. राकेश कलोरिया (रिश्वत मांगने का आरोपी) अगले ही दिन 31 दिसंबर 2005 को जयसिंहपुरा खोर स्थित पशु बाड़े में पहुंचा। इस बाड़े में स्ट्रीट डॉग को लाकर उनका वैक्सीनेशन और नसबंदी की जाती है। वहां से डॉ. राकेश कलोरिया ने मुझे फोन किया और धमकाने लगा कि- यहां व्यवस्थाएं सही नहीं हैं। इसके बाद दोपहर 3 से शाम 4 बजे के बीच एक के बाद एक तीन नोटिस जारी कर दिए। इन नोटिस की प्रति मैंने एसीबी में भी दी है। शिकायत के बाद हंसने लगीं तत्कालीन डीसी मैडम
पीड़ित डॉक्टर ने बताया कि बार-बार परेशान किए जाने पर उन्होंने नगर निगम की तत्कालीन डीसी मैडम को इन दोनों डॉक्टर की कारस्तानी बताई। मैडम ने काफी समय तक बात सुनी और उसके बाद हंसने लगीं…..मैंने पूछा मैडम मैंने ईमानदारी से काम किया है, ये लोग परेशान कर रहे हैं। आप कुछ बोलती क्यों नहीं हो, जिसके बाद डीसी मैडम हंसते हुए केबिन से बाहर चली गईं। मुख्य सचिव की मीटिंग के बाद थी ट्रैप करने की प्लानिंग
पीड़ित डॉक्टर ने बताया- जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट में डॉग बाइट को लेकर निरंतर सुनवाई चल रही थी। राजस्थान में भी डॉग बाइट को लेकर निरंतर खबरें छप रही थीं। इस दौरान राजस्थान के पूर्व मुख्य सचिव, जो वर्तमान में बॉम्बे शिफ्ट हो गए हैं, उन्होंने वर्तमान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को फोन कर मेरे बारे में बताया कि वह डॉग नसबंदी, टीकाकरण पर करीब 29 साल से बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। इसके बाद मुख्य सचिव कार्यालय से मेरे पास फोन आया और स्ट्रीट डॉग की समस्या को लेकर एक मीटिंग रखी गई। मीटिंग में कई आईएएस अधिकारी मौजूद थे। उस दौरान आरोपी डॉ. राकेश कलोरिया भी था। मुख्य सचिव ने भी पीड़ित की फर्म और काम करने के तरीके की तारीफ कर राय ली। 9 फरवरी को मीटिंग के दौरान भी एसीबी की टीम ने आरोपी को सर्विलांस में रखा हुआ था। लेकिन मीटिंग लंबी होने के कारण एसीबी ने उस दिन डॉक्टर को नहीं पकड़ा। गिरफ्तार होने के बाद भी धमकी- कहा कि फर्म बंद करा देंगे
16 फरवरी को ट्रैप के बाद 17 फरवरी को डॉ. राकेश कलोरिया और डॉ. योगेश शर्मा और दलाल ऑपरेटर जितेन्द्र को एसीबी ने कोर्ट में पेश किया गया। पीड़ित ने बताया कि इस दौरान मुझे भी एसीबी ने कोर्ट में बुलाया था। मैं कोर्ट परिसर में खड़ा था। तब दोनों डॉक्टर भी वहीं मौजूद थे। उस दौरान दोनों ने मुझे फर्म बंद कराने और देख लेने की धमकी दी। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने इसकी जानकारी अभी एसीबी को नहीं दी है। ACB ने किया था ट्रैप
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 16 फरवरी को जयपुर नगर निगम में दो वेटरनरी डॉक्टरों और एक संविदाकर्मी को 4 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। डॉक्टरों ने आवारा कुत्तों के निकाले गए यूट्रस और टेक्टिकल्स की गणना और बिल फॉरवर्ड करने की एवज में पीड़ित फर्म संचालक डॉक्टर से रिश्वत मांगी थी। ये बिल करीब 75 लाख का था। पीड़ित की शिकायत पर ACB ने संविदाकर्मी जितेंद्र सिंह शेखावत को 4 लाख रुपए घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद पशु प्रबंधन शाखा में तैनात डॉ. योगेश शर्मा, डॉ. राकेश कलोरिया को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इन दोनों डॉक्टरों को भी गिरफ्तार कर लिया था। एसीबी कोर्ट में पेशी के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत (जेसी) में भेज दिया गया है। ———— घूसखोरी के आरोपी डॉक्टर्स की यह खबर भी पढ़िए… जयपुर में 2 वेटरनरी डॉक्टर रिश्वत लेते गिरफ्तार, कम्प्यूटर ऑपरेटर के जरिए ले रहे थे 4 लाख की घूस, बिल पास करने के बदले मांगे रुपए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जयपुर नगर निगम में दो वेटरनरी डॉक्टरों और एक संविदाकर्मी को 4 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। पढ़ें पूरी खबर…

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