तिलक समारोह में जा रहे 3 दोस्तों की मौत:एक बाइक पर थे सवार, 90 की स्पीड में थे, ग्रामीण बोले- तेज मोटरसाइकिल चलाने का शौक था

तिलक समारोह में जा रहे 3 दोस्तों की मौत:एक बाइक पर थे सवार, 90 की स्पीड में थे, ग्रामीण बोले- तेज मोटरसाइकिल चलाने का शौक था

“मेरे पति बस में सवार थे। कहा था- रात 3 बजे तक लौट आएंगे। लेकिन रास्ते में क्या हुआ, पता नहीं। बस से उतरकर वो अपने दोस्त विकास और सोनू के साथ बाइक पर बैठ गए। रात 11 बजे मौत की खबर आ गई।” ये मृतक की पत्नी बबीता कुमारी का कहना है। इनके पति की मौत 2 अन्य दोस्तों के साथ हो गई। सभी एक ही बाइक पर सवार थे और 90 की स्पीड से बाइक चला रहे थे। बबीता 9 महीने की प्रेग्नेंट है। दरअसल, नवादा जिले में शनिवार रात तिलक समारोह में जा रहे 3 दोस्तों की मौत हो गई। ये सभी गया के अतरी प्रखंड के रिउला गांव के चौधरी टोला के रहने वाले थे। ये गांव की एक भगीनी की शादी में जा रहे थे। जिसके माता-पिता नहीं थे। गांव के अखिलेश कुमार, शव लाने नवादा गए थे। वो बताते हैं कि तीनों मेहनती लड़के थे। कोई नशा नहीं करते थे। लेकिन तेज बाइक चलाने का शौक था। उसी शौक ने जान ले ली। अब तीन घरों में कमाने वाला कोई नहीं बचा है। पीछे गर्भवती पत्नी, बीमार मां, विकलांग पिता और बहन की शादी रह गई हैं। मृतकों की पहचान गया जी के रिवला गांव निवासी सुनील चौधरी के बेटे सोनू कुमार (23), विजय चौधरी के बेटे प्रताप कुमार ( 23) और राजेश मांझी के बेटे इंद्रन मांझी ( 23) के रूप में हुई है। मृतकों में चाचा-भतीजा भी शामिल थे। अंतिम संस्कार के लिए 600 रुपए मुखिया ने दिए दैनिक भास्कर के रिपोर्टर मृतकों के गांव पहुंचे। यहां ज्यादातर घर फूस या कच्चे मकान के है। तीनों परिवार ईंट भट्ठे या दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर है। इनका कोई स्थायी आय नहीं है। हादसे के बाद कमाने वाला कोई नहीं बचा है। तीनों लड़के बाहर जाकर मेहनत करते थे। घर उन्हीं से चलता था। ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय मुखिया ने अंतिम संस्कार के लिए 600 रुपये दिए हैं। परिजनों ने की मुआवजे की राशि की मांग परिवार का कहना है कि कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत 20-20 हजार रुपये मिलने चाहिए थी। लेकिन, रविवार शाम तक किसी परिवार को राशि नहीं मिली। मृतक इंद्र की पत्नी बबीता बताती है कि तीनों बाइक से जा रहे थे, रास्ते में एक तीखा मोड़ आया। बाइक बेकाबू हुई और सीधे बिजली के खंभे से टकरा गई। मौके पर ही तीनों की मौत हो गई। घर के बाहर पड़ी है लाश, मां के आने का इंतजार सबसे मार्मिक दृश्य इंद्र मांझी के घर के बाहर दिखी। उनका शव घर के सामने रखा है। रविवार को अंतिम संस्कार नहीं हुआ। वजह उनकी मां कोलकाता में ईंट भट्ठे पर काम करती हैं। परिवार उनके आने का इंतजार कर रहा है। इंद्र आठ दिन पहले ही चेन्नई से गांव लौटे थे, जहां वे मजदूरी करते थे। अब उनके पीछे गर्भवती पत्नी बबीता रह गईं है। तीन छोटे बच्चे है। बबीता बार-बार एक ही बात कहती हैं कि अब पहाड़ जैसी जिंदगी कैसे कटेगी। सोनू गया तो घर का सहारा भी चला गया मृतक सोनू चौधरी अपने घर के इकलौते कमाने वाले थे। पिता सुनील चौधरी विकलांग हैं। मां लंबे समय से बीमार हैं। पिता सुनील कहते हैं कि अब दवा का खर्च कैसे चलेगा और ये घर कैसे चलेगा। बहन की शादी का सपना अधूरा छोड़ गया विकास मृतक विकास की बड़ी बहन प्रिया रोते हुए बताती हैं कि वह कहता था, मजदूरी करके छोटी बहन की शादी कराएगा। पैसा जोड़ रहा था। हम 2 बहन है। अब छोटी बहन की शादी कौन कराएगा। वो ईंट भट्ठे पर काम करता था। घर का वही एक सहारा था। मां बेटे की मौत के बाद बार-बार बेहोश हो रही हैं। ग्रामीण अखिलेश कुमार कहते हैं कि अगर बस से चले जाते, तो आज जिंदा होते। एक गर्भवती पत्नी का सहारा चला गया। एक विकलांग पिता बेसहारा हो गया। एक बहन की शादी अधूरी रह गई। बस से जाते तो तीनों जिंदा होते। रफ्तार ने सब कुछ छीन लिया। नवादा पुलिस ने दी परिजनों को सूचना नवादा के सीतामढ़ी थाना प्रभारी पप्पू शर्मा ने बताया कि सबसे पहले आपातकालीन सेवा 112 को सूचना मिली थी कि 3 लोगों की मौत हो गई है। तुरंत इसकी जानकारी हम लोगों को मिली। मृतकों का शव जमीन पर गिरा था और सभी लोगों की मौत हो चुकी थी। जिसके बाद परिवार को हम लोगों ने सूचना दी और सभी लोगों का पोस्टमार्टम करवा कर परिवार के हवाले मृतक के शव को सौंप दिया। सभी एक ही गांव के रहने वाले थे। सभी लोग तिलक समारोह में जा रहे थे, तभी यह घटना घटी है। “मेरे पति बस में सवार थे। कहा था- रात 3 बजे तक लौट आएंगे। लेकिन रास्ते में क्या हुआ, पता नहीं। बस से उतरकर वो अपने दोस्त विकास और सोनू के साथ बाइक पर बैठ गए। रात 11 बजे मौत की खबर आ गई।” ये मृतक की पत्नी बबीता कुमारी का कहना है। इनके पति की मौत 2 अन्य दोस्तों के साथ हो गई। सभी एक ही बाइक पर सवार थे और 90 की स्पीड से बाइक चला रहे थे। बबीता 9 महीने की प्रेग्नेंट है। दरअसल, नवादा जिले में शनिवार रात तिलक समारोह में जा रहे 3 दोस्तों की मौत हो गई। ये सभी गया के अतरी प्रखंड के रिउला गांव के चौधरी टोला के रहने वाले थे। ये गांव की एक भगीनी की शादी में जा रहे थे। जिसके माता-पिता नहीं थे। गांव के अखिलेश कुमार, शव लाने नवादा गए थे। वो बताते हैं कि तीनों मेहनती लड़के थे। कोई नशा नहीं करते थे। लेकिन तेज बाइक चलाने का शौक था। उसी शौक ने जान ले ली। अब तीन घरों में कमाने वाला कोई नहीं बचा है। पीछे गर्भवती पत्नी, बीमार मां, विकलांग पिता और बहन की शादी रह गई हैं। मृतकों की पहचान गया जी के रिवला गांव निवासी सुनील चौधरी के बेटे सोनू कुमार (23), विजय चौधरी के बेटे प्रताप कुमार ( 23) और राजेश मांझी के बेटे इंद्रन मांझी ( 23) के रूप में हुई है। मृतकों में चाचा-भतीजा भी शामिल थे। अंतिम संस्कार के लिए 600 रुपए मुखिया ने दिए दैनिक भास्कर के रिपोर्टर मृतकों के गांव पहुंचे। यहां ज्यादातर घर फूस या कच्चे मकान के है। तीनों परिवार ईंट भट्ठे या दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर है। इनका कोई स्थायी आय नहीं है। हादसे के बाद कमाने वाला कोई नहीं बचा है। तीनों लड़के बाहर जाकर मेहनत करते थे। घर उन्हीं से चलता था। ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय मुखिया ने अंतिम संस्कार के लिए 600 रुपये दिए हैं। परिजनों ने की मुआवजे की राशि की मांग परिवार का कहना है कि कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत 20-20 हजार रुपये मिलने चाहिए थी। लेकिन, रविवार शाम तक किसी परिवार को राशि नहीं मिली। मृतक इंद्र की पत्नी बबीता बताती है कि तीनों बाइक से जा रहे थे, रास्ते में एक तीखा मोड़ आया। बाइक बेकाबू हुई और सीधे बिजली के खंभे से टकरा गई। मौके पर ही तीनों की मौत हो गई। घर के बाहर पड़ी है लाश, मां के आने का इंतजार सबसे मार्मिक दृश्य इंद्र मांझी के घर के बाहर दिखी। उनका शव घर के सामने रखा है। रविवार को अंतिम संस्कार नहीं हुआ। वजह उनकी मां कोलकाता में ईंट भट्ठे पर काम करती हैं। परिवार उनके आने का इंतजार कर रहा है। इंद्र आठ दिन पहले ही चेन्नई से गांव लौटे थे, जहां वे मजदूरी करते थे। अब उनके पीछे गर्भवती पत्नी बबीता रह गईं है। तीन छोटे बच्चे है। बबीता बार-बार एक ही बात कहती हैं कि अब पहाड़ जैसी जिंदगी कैसे कटेगी। सोनू गया तो घर का सहारा भी चला गया मृतक सोनू चौधरी अपने घर के इकलौते कमाने वाले थे। पिता सुनील चौधरी विकलांग हैं। मां लंबे समय से बीमार हैं। पिता सुनील कहते हैं कि अब दवा का खर्च कैसे चलेगा और ये घर कैसे चलेगा। बहन की शादी का सपना अधूरा छोड़ गया विकास मृतक विकास की बड़ी बहन प्रिया रोते हुए बताती हैं कि वह कहता था, मजदूरी करके छोटी बहन की शादी कराएगा। पैसा जोड़ रहा था। हम 2 बहन है। अब छोटी बहन की शादी कौन कराएगा। वो ईंट भट्ठे पर काम करता था। घर का वही एक सहारा था। मां बेटे की मौत के बाद बार-बार बेहोश हो रही हैं। ग्रामीण अखिलेश कुमार कहते हैं कि अगर बस से चले जाते, तो आज जिंदा होते। एक गर्भवती पत्नी का सहारा चला गया। एक विकलांग पिता बेसहारा हो गया। एक बहन की शादी अधूरी रह गई। बस से जाते तो तीनों जिंदा होते। रफ्तार ने सब कुछ छीन लिया। नवादा पुलिस ने दी परिजनों को सूचना नवादा के सीतामढ़ी थाना प्रभारी पप्पू शर्मा ने बताया कि सबसे पहले आपातकालीन सेवा 112 को सूचना मिली थी कि 3 लोगों की मौत हो गई है। तुरंत इसकी जानकारी हम लोगों को मिली। मृतकों का शव जमीन पर गिरा था और सभी लोगों की मौत हो चुकी थी। जिसके बाद परिवार को हम लोगों ने सूचना दी और सभी लोगों का पोस्टमार्टम करवा कर परिवार के हवाले मृतक के शव को सौंप दिया। सभी एक ही गांव के रहने वाले थे। सभी लोग तिलक समारोह में जा रहे थे, तभी यह घटना घटी है।  

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