कोसी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने सदन में पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय और अधिकारों को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों में कटौती कर रही है, जिससे जमीनी स्तर पर विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। MLC ने विशेष रूप से वार्ड सदस्यों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पहले नल-जल योजना के तहत वार्ड स्तर पर जलापूर्ति व्यवस्था की देखरेख की जिम्मेदारी वार्ड सदस्यों को एक निश्चित मानदेय पर दी जाती थी, लेकिन अब उन्हें इस जिम्मेदारी और मानदेय दोनों से वंचित कर दिया गया है। मानदेय में लंबे समय से वृद्धि नहीं होने का मुद्दा भी उठाया इसके अलावा उन्होंने पंचायत सचिव, जिला परिषद सदस्य, नगर निगम और नगर परिषद के वार्ड कमिश्नरों के मानदेय में लंबे समय से वृद्धि नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति पंचायत व्यवस्था को कमजोर कर रही है। सदन में उन्होंने कुमार कलानंद मणि द्वारा लिखित पुस्तक पंचायती राज और ग्राम सरकार का उल्लेख करते हुए महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, विनोबा भावे और रजनी कोठारी जैसे विचारकों के ग्राम पंचायत संबंधी विचारों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि जब तक ग्राम पंचायत और स्थानीय निकाय मजबूत नहीं होंगे, तब तक राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है। मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने की मांग डॉ. सिंह ने सरकार से अपील की कि ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच, पंच, समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और वार्ड कमिश्नर के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए। कोसी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने सदन में पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय और अधिकारों को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों में कटौती कर रही है, जिससे जमीनी स्तर पर विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। MLC ने विशेष रूप से वार्ड सदस्यों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पहले नल-जल योजना के तहत वार्ड स्तर पर जलापूर्ति व्यवस्था की देखरेख की जिम्मेदारी वार्ड सदस्यों को एक निश्चित मानदेय पर दी जाती थी, लेकिन अब उन्हें इस जिम्मेदारी और मानदेय दोनों से वंचित कर दिया गया है। मानदेय में लंबे समय से वृद्धि नहीं होने का मुद्दा भी उठाया इसके अलावा उन्होंने पंचायत सचिव, जिला परिषद सदस्य, नगर निगम और नगर परिषद के वार्ड कमिश्नरों के मानदेय में लंबे समय से वृद्धि नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति पंचायत व्यवस्था को कमजोर कर रही है। सदन में उन्होंने कुमार कलानंद मणि द्वारा लिखित पुस्तक पंचायती राज और ग्राम सरकार का उल्लेख करते हुए महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, विनोबा भावे और रजनी कोठारी जैसे विचारकों के ग्राम पंचायत संबंधी विचारों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि जब तक ग्राम पंचायत और स्थानीय निकाय मजबूत नहीं होंगे, तब तक राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है। मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने की मांग डॉ. सिंह ने सरकार से अपील की कि ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूत करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच, पंच, समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और वार्ड कमिश्नर के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए।


