औरंगाबाद शहर के एक होटल में आज सदर प्रखंड मुखिया संघ की अध्यक्षता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में देव प्रखंड के दुलारे पंचायत के मुखिया विजेंद्र यादव की गिरफ्तारी का विरोध किया गया। इस दौरान जिले भर से पहुंचे मुखियाओं ने एक स्वर में इसे तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई बताते हुए जिला प्रशासन और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। मुखिया संघ के पदाधिकारी सुजीत सिंह ने कहा कि विजेंद्र यादव की गिरफ्तारी पूरी तरह से गलत और दुर्भावनापूर्ण है। उन्होंने बताया कि जिस मामले में मुखिया की गिरफ्तारी की गई है, वह दरअसल भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का मामला है। दुलारे पंचायत में अम्बेडकर आवासीय विद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण काम में बालू की जगह डस्ट (पत्थर का चूरा) का उपयोग किया जा रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर मुखिया विजेंद्र यादव जांच के लिए मौके पर गए, जहां उन्हें स्पष्ट गड़बड़ी मिली। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन पर बेवजह आरोप लगाए गए और कथित रूप से मारपीट भी की गई। इसके बाद ढिबरा थाना में झूठा एफआईआर दर्ज कराकर 24 घंटे के भीतर उनकी गिरफ्तारी कर ली गई। अपने क्षेत्र में साइट का निरीक्षण करेंगे मुखिया सुजीत सिंह ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर एक मुखिया को इतनी जल्दी जेल भेजा जा सकता है, तो फिर गलत तरीके से हो रहे निर्माण काम को भी तत्काल बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अब सभी मुखिया संबंधित साइट का निरीक्षण करेंगे और जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां काम रुकवाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले का पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है और ईमानदारी से काम करना पंचायत प्रतिनिधियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। शहर में बिना लाइसेंस के चल रहे अवैध बूचड़खाने उन्होंने आगे कहा कि औरंगाबाद में किसी भी वैध बूचड़खाने का लाइसेंस नहीं है, इसके बावजूद खुलेआम अवैध गतिविधियां हो रही हैं। जब कोई मुखिया भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उस पर रंगदारी या गुंडागर्दी जैसे आरोप थोप दिए जाते हैं। सुजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार को बदनाम करने का काम खुद स्थानीय अधिकारी कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एक भी और मुखिया को जेल भेजा गया, तो सभी मुखिया आंदोलन के लिए बाध्य होंगे और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जाएंगे। झूठे आरोप में मुखिया को गिरफ्तार करना गलत प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूही पंचायत के मुखिया मंजीत यादव ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में हो रहे किसी भी विकास काम की जांच करना मुखिया का अधिकार और दायित्व है। सरकार की योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो रहा है या नहीं, यह देखना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। जूनियर इंजीनियर (जेई) के माध्यम से थाना में गलत आवेदन दिया गया, जिसमें मुखिया पर गुंडागर्दी और रंगदारी मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मुखिया को रंगदारी मांगनी होती, तो वह ठेकेदार से मांगता, जेई से क्यों मांगता। मंजीत यादव ने थाना प्रभारी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि बिना किसी जांच के गिरफ्तारी करना किस नियम के तहत किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में अफसरशाही हावी है और जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में सभी मुखियाओं ने एकजुट होकर कहा कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और जरूरत पड़ी, तो सड़कों पर उतर कर आंदोलन करेंगे। औरंगाबाद शहर के एक होटल में आज सदर प्रखंड मुखिया संघ की अध्यक्षता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में देव प्रखंड के दुलारे पंचायत के मुखिया विजेंद्र यादव की गिरफ्तारी का विरोध किया गया। इस दौरान जिले भर से पहुंचे मुखियाओं ने एक स्वर में इसे तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई बताते हुए जिला प्रशासन और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। मुखिया संघ के पदाधिकारी सुजीत सिंह ने कहा कि विजेंद्र यादव की गिरफ्तारी पूरी तरह से गलत और दुर्भावनापूर्ण है। उन्होंने बताया कि जिस मामले में मुखिया की गिरफ्तारी की गई है, वह दरअसल भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का मामला है। दुलारे पंचायत में अम्बेडकर आवासीय विद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण काम में बालू की जगह डस्ट (पत्थर का चूरा) का उपयोग किया जा रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर मुखिया विजेंद्र यादव जांच के लिए मौके पर गए, जहां उन्हें स्पष्ट गड़बड़ी मिली। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन पर बेवजह आरोप लगाए गए और कथित रूप से मारपीट भी की गई। इसके बाद ढिबरा थाना में झूठा एफआईआर दर्ज कराकर 24 घंटे के भीतर उनकी गिरफ्तारी कर ली गई। अपने क्षेत्र में साइट का निरीक्षण करेंगे मुखिया सुजीत सिंह ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर एक मुखिया को इतनी जल्दी जेल भेजा जा सकता है, तो फिर गलत तरीके से हो रहे निर्माण काम को भी तत्काल बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अब सभी मुखिया संबंधित साइट का निरीक्षण करेंगे और जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां काम रुकवाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले का पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है और ईमानदारी से काम करना पंचायत प्रतिनिधियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। शहर में बिना लाइसेंस के चल रहे अवैध बूचड़खाने उन्होंने आगे कहा कि औरंगाबाद में किसी भी वैध बूचड़खाने का लाइसेंस नहीं है, इसके बावजूद खुलेआम अवैध गतिविधियां हो रही हैं। जब कोई मुखिया भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उस पर रंगदारी या गुंडागर्दी जैसे आरोप थोप दिए जाते हैं। सुजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार को बदनाम करने का काम खुद स्थानीय अधिकारी कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एक भी और मुखिया को जेल भेजा गया, तो सभी मुखिया आंदोलन के लिए बाध्य होंगे और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जाएंगे। झूठे आरोप में मुखिया को गिरफ्तार करना गलत प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूही पंचायत के मुखिया मंजीत यादव ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में हो रहे किसी भी विकास काम की जांच करना मुखिया का अधिकार और दायित्व है। सरकार की योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो रहा है या नहीं, यह देखना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। जूनियर इंजीनियर (जेई) के माध्यम से थाना में गलत आवेदन दिया गया, जिसमें मुखिया पर गुंडागर्दी और रंगदारी मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मुखिया को रंगदारी मांगनी होती, तो वह ठेकेदार से मांगता, जेई से क्यों मांगता। मंजीत यादव ने थाना प्रभारी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि बिना किसी जांच के गिरफ्तारी करना किस नियम के तहत किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में अफसरशाही हावी है और जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में सभी मुखियाओं ने एकजुट होकर कहा कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और जरूरत पड़ी, तो सड़कों पर उतर कर आंदोलन करेंगे।


